Sunday, November 6, 2016

फैंगशुई के उपाय

  1. फेंगशुई में ऐसी मान्यता है कि हमारे आस-पास ऊर्जा का अनंत असीम स्रोत है। यह ऊर्जा सकारात्मक (पॉजिटिव) और नकारात्मक (नेगेटिव) दोनों प्रकार की होती है। इस ऊर्जा से हमारे जीवन का प्रत्येक पहलू प्रभावित होता है। हमारे दांपत्य जीवन पर भी इस ऊर्जा का बहुत ही असर पड़ता है। फेंगशुई मुख्यता हमारे घर हमारे जीवन में नकारात्मक ऊर्जा को निष्क्रिय करके सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है।
  2. फेंगशुई में घर के दक्षिण-पश्चिम खंड को आपसी रिश्तों के लिए सक्रिय माना गया है। इसलिए इस खंड में सकारात्मक ऊर्जा को सक्रिय और नकारात्मक ऊर्जा को निष्क्रिय करने के लिए आप जो भी प्रयास करेंगे, वह बहुत फलदाई साबित होगा।
  3. हमेशा याद रखिये कि अपना बिस्तर खिड़की से सटाकर कभी भी न लगाएँ। इससे रिश्तों में तनाव उत्पन्न होता है और आपसी असहयोग की प्रवृत्ति बडती है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए अपने सिरहाने और खिड़की के बीच पर्दा जरूर डालें। इससे नकारात्मक ऊर्जा आपके रिश्तों पर असर नहीं कर पाएगी।
  4. ऐसी चीज का प्रयोग करने से बचें जो अलगाव दर्शाती हो। छत पर बीम का होना और दो अलग मैट्रेस का प्रयोग भी प्रेम संबंधो में दूरी बनाता है, जहाँ तक संभव हो पति पत्नी एक ही मैट्रेस के ऊपर सोयें।
  5. नवदंपतियों के लिए बिस्तर बिलकुल नया होना चाहिए। कोशिश करें कि ऐसी चादर बिलकुल ही प्रयोग में न लाएँ

हम यहाँ पर आपके लिए कुछ बहुत ही आसान फैंगशुई प्रोडक्ट की जानकारी दे रहे है हमें विश्वास है कि यह आपके लिए अवश्य ही फलदाई साबित होंगे ।

  1. लॉफिंग बुद्धा की मूर्ति: लॉफिंग बुद्धा की मूर्ति फेंगशुई में बहुत शुभ मानी जाती है। उसे अपने ड्राइंग रूम में ठीक सामने की ओर रखें ताकि घर में प्रवेश करते ही आपकी नजर सबसे पहले उस मूर्ति पर पड़े। लाफिंग बुद्धा: हंसते हुए बुद्ध की मूर्ति धन दौलत के देवताओं में से एक मानी जाती है। इससे घर में संपन्नता, सफलता और समृद्धि आती है। यह मूर्ति शयन कक्ष तथा भोजन कक्ष में नहीं रखनी चाहिए।
  2. विंड चाईम:विंड चाईम अर्थात् हवा से जिसमें झंकार हो, ऐसी पवन घंटी घर व व्यापार के वातावरण को मधुर बनाती है। वास्तु और फेंगशुई के पाँच तत्वों को दर्शाने वाली पाँच राड की विंड चाईम शुभ मानी जाती है। ब्रह्म स्थान पर लगाने से स्वास्थ्य लाभ व उत्तर पश्चिम में लगाने से जीवन में नये सुअवसर प्राप्त होते हैं।
  3. तीन टांग का मेंढक: मुंह में सिक्का लिए तीन टांग का मेंढक धन प्राप्ति के लिए बहुत शुभ माना गया है। इसे इस प्रकार ही लगाना चाहिए जिससे यह लगे कि यह धन लेकर घर के अंदर आ रहा है। इसे रसोई या शौचालय में कभी नहीं रखना चाहिए।
  4. धातु का कछुआ:धातु का कछुआ आयु को बढ़ाने वाला व धन समृद्धि देने वाला है।

Thursday, November 3, 2016

वास्तु उपाय

वास्तुशास्त्र के नियमों के उचित पालन से शरीर की जैव-रासायनिक क्रिया को संतुलित रखने में सहायता मिलती है।

घर या वास्तु के मुख्य दरवाजे में देहरी (दहलीज) लगाने से अनेक अनिष्टकारी शक्तियाँ प्रवेश नहीं कर पातीं व दूर रहती हैं। प्रतिदिन सुबह मुख्य द्वार के सामने हल्दी, कुमकुम व गोमूत्र मिश्रित गोबर से स्वस्तिक, कलश आदि आकारों में रंगोली बनाकर देहरी (दहलीज) एवं रंगोली की पूजा कर परमेश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए कि 'हे ईश्वर ! आप मेरे घर व स्वास्थ्य की अनिष्ट शक्तियों से रक्षा करें।'

प्रवेश-द्वार के ऊपर नीम, आम, अशोक आदि के पत्ते का तोरण (बंदनवार) बाँधना मंगलकारी है।

वास्तु कि मुख्य द्वार के सामने भोजन-कक्ष, रसोईघर या खाने की मेज नहीं होनी चाहिए।

मुख्य द्वार के अलावा पूजाघर, भोजन-कक्ष एवं तिजोरी के कमरे के दरवाजे पर भी देहरी (दहलीज) अवश्य लगवानी चाहिए।

भूमि-पूजन, वास्तु-शांति, गृह-प्रवेश आदि सामान्यतः शनिवार एवं मंगलवार को नहीं करने चाहिए।

गृहस्थियों को शयन-कक्ष में सफेद संगमरमर नहीं लगावाना चाहिए| इसे मन्दिर मे लगाना उचित है क्योंकि यह पवित्रता का द्योतक है।

कार्यालय के कामकाज, अध्ययन आदि के लिए बैठने का स्थान छत की बीम के नीचे नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे मानसिक दबाव रहता है।

बीम के नीचे वाले स्थान में भोजन बनाना व करना नहीं चाहिए। इससे आर्थिक हानि हो सकती है। बीम के नीचे सोने से स्वास्थ्य में गड़बड़ होती है तथा नींद ठीक से नहीं आती।

जिस घर, इमारत आदि के मध्य भाग (ब्रह्मस्थान) में कुआँ या गड्ढा रहता है, वहाँ रहने वालों की प्रगति में रूकावट आती है एवं अनेक प्रकार के दुःखों एवं कष्टों का सामना करना पड़ता है।

घर का ब्रह्मस्थान परिवार का एक उपयोगी मिलन स्थल है, जो परिवार को एक डोर में बाँधे रखता है।

यदि ब्रह्मस्थान की चारों सीमारेखाओं की अपेक्षा उसका केन्द्रीय भाग नीचा हो या केन्द्रीय भाग पर कोई वजनदार वस्तु रखी हो तो इसको बहुत अशुभ व अनिष्टकारी माना जाता है। इससे आपकी आंतरिक शक्ति में कमी आ सकती है व इसे संततिनाशक भी बताया गया है।

ब्रह्मस्थान में क्या निर्माण करने से क्या लाभ व क्या हानियाँ होती हैं, इसका विवरण इस प्रकार हैः

बैठक कक्ष- परिवार के सदस्यों में सामंजस्य

भोजन कक्ष- गृहस्वामी को समस्याएँ, गृहनाश

सीढ़ियाँ – मानसिक तनाव व धन नाश

लिफ्ट – गृहनाश

शौचालय – धनहानि एवं स्वास्थ्य हानि

परिभ्रमण स्थान – उत्तम

गृहस्वामी द्वारा ब्रह्मस्थान पर रहने, सोने या फैक्ट्री, दफ्तर, दुकान आदि में बैठने से बाकी सभी लोग उसके कहे अनुसार कार्य करते हैं और आज्ञापालन में विरोध नहीं करते। अपने अधीन कर्मचारी को इस स्थान पर नहीं बैठाना चाहिए, अन्यथा उसका प्रभाव आपसे अधिक हो जायेगा। इस स्थान को कभी भी किराये पर नहीं देना चाहिए।

नैर्ऋत्य दिशा में यदि शौचालय अथवा रसोईघर का निर्माण हुआ हो तो गृहस्वामी को सदैव स्वास्थ्य-संबंधी मुश्किलें रहती हैं। अतः इन्हें सर्वप्रथम हटा लेना चाहिए। चीनी 'वायु-जल' वास्तुपद्धति'फेंगशुई' के मत से यहाँ गहरे पीले रंग का 0 वाट का बल्ब सदैव जलता रखने से इस दोष का काफी हद तक निवारण सम्भव है।

ईशान रखें नीचा, नैर्ऋत्य रखें ऊँचा।

यदि चाहते हों वास्तु से अच्छा नतीजा।।

शौचकूप (सैप्टिक टैंक) उत्तर दिशा के मध्यभाग में बनाना सर्वोचित रहता है। यदि वहाँ सम्भव न हो तो पूर्व के मध्य भाग में बना सकते हैं परंतु वास्तु के नैर्ऋत्य, ईशान, दक्षिण, ब्रह्मस्थल एवं अग्नि भाग में सैप्टिक टैंक बिल्कुल नहीं बनाना चाहिए।

प्लॉट या मकान के नैर्ऋत्य कोने में बना कुआँ अथवा भूमिगत जल की टंकी सबसे ज्यादा हानिकारक होती है। इसके कारण अकाल मृत्यु, हिंसाचार, अपयश, धन-नाश, खराब प्रवृत्ति, आत्महत्या, संघर्ष आदि की सम्भावना बहुत ज्यादा होती है।

पितृ दोष शांति के उपाय

 

पितृ दोष के शांति के उपाय

  1. कुंडली में पितृ दोष बन रहा हो तब जातक को घर की दक्षिण दिशा की दीवार पर अपने स्वर्गीय परिजनों का फोटो लगाकर उस पर हार चढ़ाकर रोजाना उनकी पूजा स्तुति करना चाहिए। उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है।
  2. अपने स्वर्गीय परिजनों की निर्वाण तिथि पर जरूरतमंदों अथवा गुणी ब्राह्मणों को भोजन कराए। भोजन में मृतात्मा की कम से कम एक पसंद की वस्तु अवश्य बनाएं।
  3. इसी दिन अगर हो सके तो अपनी सामर्थ्यानुसार गरीबों को वस्त्र और अन्न आदि दान करने से भी यह दोष मिटता है।
  4. पीपल के वृक्ष पर दोपहर में जल, पुष्प, अक्षत, दूध, गंगाजल, काले तिल चढ़ाएं और स्वर्गीय परिजनों का स्मरण कर उनसे आशीर्वाद मांगें।
  5. शाम के समय में दीप जलाएं और नाग स्तोत्र, महामृत्युंजय मंत्र या रुद्र सूक्त या पितृ स्तोत्र व नवग्रह स्तोत्र का पाठ करें। इससे भी पितृ दोष की शांति होती है।
  6. सोमवार प्रात:काल में स्नान कर नंगे पैर शिव मंदिर में जाकर आक के 21 पुष्प, कच्ची लस्सी, बिल्वपत्र के साथ शिवजी की पूजा करें। 21 सोमवार करने से पितृदोष का प्रभाव कम होता है।
  7. प्रतिदिन इष्ट देवता व कुल देवता की पूजा करने से भी पितृ दोष का शमन होता है।
  8. कुंडली में पितृदोष होने से किसी गरीब कन्या का विवाह या उसकी बीमारी में सहायता करने पर भी लाभ मिलता है।
  9. ब्राह्मणों को प्रतीकात्मक गोदान, गर्मी में पानी पिलाने के लिए कुंए खुदवाएं या राहगीरों को शीतल जल पिलाने से भी पितृदोष से छुटकारा मिलता है।
  10. पवित्र पीपल तथा बरगद के पेड़ लगाएं। विष्णु भगवान के मंत्र जाप, श्रीमद्‍भागवत गीता का पाठ करने से भी पित्तरों को शांति मिलती है और दोष में कमी आती है।
  11. पितरों के नाम पर गरीब विद्यार्थियों की मदद करने तथा दिवंगत परिजनों के नाम से अस्पताल, मंदिर, विद्यालय, धर्मशाला आदि का निर्माण करवाने से भी अत्यंत लाभ मिलता है।
  12. पित्र दोष निवारण मन्त्र :
  13. मन्त्र 1 — ॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः ।मन्त्र २– ॐ प्रथम पितृ नारायणाय नमः ।।
  14. याद रखे घर के सभी बड़े बुजर्ग को हमेशा प्रेम, सम्मान, और पूर्ण अधिकार दिया जाय , घर के महत्वपूर्ण मसलों पर उनसे सलाह मशविरा करते हुए उनकी राय का भी पूर्ण आदर किया जाय ,प्रतिदिन उनका अभिवादन करते हुए उनका आशीर्वाद लेने, उन्हे पूर्ण रूप से प्रसन्न एवं संतुष्ट रखने से भी निश्चित रूप से पित्र दोष में लाभ मिलता है ।
  15. अपने ज्ञात अज्ञात पूर्वजो के प्रति ईश्वर उपासना के बाद उनके प्रति कृतज्ञता का भाव रखने उनसे अपनी जाने अनजाने में की गयी भूलों की क्षमा माँगने से भी पित्र प्रसन्न होते है ।
  16. सोमवती अमावस्या को दूध की खीर बना, पितरों को अर्पित करने से भी इस दोष में कमी होती है ।
  17. सोमवती अमावस्या के दिन यदि कोई व्यक्ति पीपल के पेड़ पर मीठा जल मिष्ठान एवं जनेऊ अर्पित करते हुये “ऊँ नमो भगवते वासुदेवाएं नमः” मंत्र का जाप करते हुए कम से कम सात या 108 परिक्रमा करे तत्पश्चात् अपने अपराधों एवं त्रुटियों के लिये क्षमा मांगे तो पितृ दोष से उत्पन्न समस्त समस्याओं का निवारण हो जाता है।
  18. प्रत्येक अमावस्या को गाय को पांच फल भी खिलाने चाहिए।
  19. अमावस्या को बबूल के पेड़ पर संध्या के समय भोजन रखने से भी पित्तर प्रसन्न होते है।
  20. प्रत्येक अमावस्या को एक ब्राह्मण को भोजन कराने व दक्षिणा वस्त्र भेंट करने से पितृ दोष कम होता है ।
  21. पितृ दोष से पीड़ित व्यक्ति को प्रतिदिन शिव लिंग पर जल चढ़ाकर महामृत्यूंजय का जाप करना चाहिए ।
  22. माँ काली की नियमित उपासना से भी पितृ दोष में लाभ मिलता है।
  23. आप चाहे किसी भी धर्म को मानते हो घर में भोजन बनने पर सर्वप्रथम पित्तरों के नाम की खाने की थाली निकालकर गाय को खिलाने से उस घर पर पित्तरों का सदैव आशीर्वाद रहता है घर के मुखियां को भी चाहिए कि वह भी अपनी थाली से पहला ग्रास पित्तर ko arpit kare
  24. अमावस्या के दिन पीले कपड़े का त्रिकोना झंडा बना कर विष्णु भगवान के मंदिर के ऊपर लगवा दें, कार्य सिद्ध होगा।

सूर्यकृत पितृदोष के उपाय

  1. शुक्लपक्ष के प्रथम रविवार के दिन घर में विध विधान से सूर्ययंत्र स्थापित करें। सूर्य को नित्य तांबे के पात्र में जल लेकर अघ्र्य दें। जल में कोई लाल पुष्प चावल व रोली अवश्य मिश्रित कर लें। जब घर से बाहर जाएं तो यंत्र दर्शन जरूर करें।
  2. निम्न मंत्र का एक माला नित्य जप करें। ध्यान रहे आपका मुख पूर्व दिशा में हो। ऊं आदित्याय विद्महे, प्रभाकराय, धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्।।
  3. ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष के प्रथम रविवार से प्रारंभ कर कम से कम 12 व अधिक से अधिक 30 रविवार व्रत रखें। सूर्यास्त के पूर्व गेहूं गुड घी आदि से बनी कोई सामग्री खा कर व्रतपूर्ण करें। व्रत के दिन सूर्य स्तोत्र का पाठ भी करें।
  4. लग्नानुसार सोने या तांबे में 5 रत्ती के ऊपर का माणिक्य रविवार के दिन विधि विधान से धारण कर लें।
  5. पांच मुख रूद्राक्ष धारण करें। तथा नित्य द्वादश ज्योतिर्लिंगो के नामों का स्मरण करें।
  6. पिता का अपमान न करें। बड़े बुजुर्गों को सम्मान दें।
  7. रविवार के दिन गाय को गेहूं व गुउ़ खिलाएं। स्वयं घर से बाहर जाते समय गुड़ खाकर निकला करें।
  8. दूध में शहद मिलाकर पिया करें।
  9. सदैव लाल रंग का रूमाल अपने पास अवश्य रखें।

अन्य टोटके / उपाय

 

सम्मोहन सिद्धि, देव कृपा प्राप्ति अथवा अन्य शुभ एवं सात्विक कार्यों की सिद्धि के लिए पूर्व दिशा की ओर मुख करके टोटके किए जाते हैं।

मान-सम्मान, प्रतिष्ठा व लक्ष्मी प्राप्ति के लिए किए जाने वाले टोटकों के लिए पश्चिम दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ होता है।

उत्तर दिशा की ओर मुख करके उन टोटकों को किया जाता है जिनका उद्देश्य रोगों की चिकित्सा, मानसिक शांति एवं आरोग्य प्राप्ति होता है।

रोग मुक्ति के लिए किए जाने वाले टोटकों के लिए मंगलवार एवं श्रावण मास उत्तम समय है।

संतान और वैभव पाने के लिए गुरुवार तथा आश्विन, कार्तिक एवं मार्गशीर्ष मास में टोटकों का प्रयोग करना चाहिए।

मां सरस्वती की प्रसन्नता व शिक्षा में सफलता के लिए बुधवार एवं गुरुवार तथा माघ, फाल्गुन और चैत्र मास में टोटका करना चाहिए।

 

नौकरी,रोजगार में सफलता के लिए

एक बिना दाग वाला पीला नींबू लें, उसके चार बराबर टुकड़े कर लें. जब दिन ढल जाये तब चौराहे पर जाकर चारों दिशाओं में उन्हे एक-एक फेंक दें और बिना पीछे मुड़े देखे घर आ जायें. आपको शीध्र ही लाभ होगा. यह प्रयोग सात दिन लगातार करें. आपका काम शीध्र बनेगा व आपको  मिलेगा ।

अपने कार्य क्षेत्र में धन लाभ एवं निरंतर सफलता प्राप्त करने के लिए घर में बनने वाली पहली 3 रोटी गाय , कुत्ते और पक्षियों ( कौओं ) के लिए निकाल कर उन्हें घी और हल्का मीठा लगाकर लगाकर देने से सदैव लाभ ही लाभ की प्राप्ति होती है । बुधवार को गाय को हरी सब्जी ध्चारा एवं गुरुवार को प्रातः तुलसी में थोडा कच्चा दूध डालने से भी उस घर में हमेशा सम्रद्धि बनी रहती है ।

जब भी आप अपने कार्य क्षेत्र में जाये तो अपने इष्ट देव को ध्यान करके सुगन्धित इत्र लगाकर ही घर से जाये ।

बेरोजगार को रोजगार पाने के लिये प्रत्येक बुधवार को गणेश जी को मूंगा के लड्डू चढाने चाहिए। उस दिन व्रत भी रखें। शीघ्र ही रोजगार प्राप्त होगा।

बेरोजगार को रोजगार पाने के लिये प्रत्येक बुधवार को गणेश जी को मूंगा के लड्डू चढाने चाहिए। उस दिन व्रत भी रखें। शीघ्र ही रोजगार प्राप्त होगा।

नौकरी प्राप्ति के लिये एक बारहमुखी रुद्राक्ष को अभिमंत्रित कर गले में धारण करें।

कुएं में दूध डालें! उस कुएं में पानी होना चहिए ।

काला कम्बल किसी गरीब को दान दें ।

6 मुखी रूद्राक्ष की माला 108 मनकों वाली माला धारण करें जिसमें हर मनके के बाद चांदी के टुकडे पिरोये हों ।

अपनी अच्छी नौकरी के लिए प्रत्येक सोमवार को शिव जी के मंदिर जाकर शिवलिंग पर मीठा कच्चा दूध चढ़ाते हुए अखंडित अक्षत ( साबुत चावल , जो टूटे हुए ना हो ) अर्पित करके भगवान भोले नाथ से अपने मन की बात करें । इससे नौकरी में आने वाली समस्त अड़चने दूर हो जाती है ।

माह की किसी भी गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी का कोई ऐसा चित्र या मूर्ति जिसमें उनकी सूंड़ दाईं ओर मुड़ी हो उस पर 7 या 11 दूर्वा अर्पित करें । फिर भगवान के आगे लौंग तथा सुपारी रखकर पूरी श्रद्धा से उनकी पूजा करें। तत्पश्चात जब भी किसी नौकरी के लिए या महत्वपूर्ण काम पर जाना हो तो इस लौंग को तथा सुपारी को साथ लेकर जाएं। आपको अपने कार्यों में सफलता मिलेगी ।

जिन व्यक्तियों को बेहतर व्यापार , नौकरी की चाह है वह अपने घर में बजरंग बली का फोटो जिसमें उनका उड़ता हुआ चित्र हो लगाकर उसकी पूजा करें ।

अगर आपको नौकरी या काम नहीं मिल रहा है और आप मारे-मारे फिर रहे हैं तो एक दागरहित बड़ा नीबूं लें और चौराहे पर बारह बजे से पहले जाकर उसके चार हिस्से कर लें और चारों दिशाओं में दूर-दूर फेंक दें। फलस्वरूप बेरोजगारी की समस्या समाप्त हो जाएगी।

 

नौकरी में प्रमोशन पाने के लिए

गुरूवार को किसी मंदिर में पीली वस्तुये जैसे खाद्य पदार्थ, फल, कपडे इत्यादि का दान करें ।

हर सुबह नंगे पैर घास पर चलें ।

अगर नौकरी में तरक्की चाहते हैं, तो 7 तरह का अनाज चिड़ियों को डालें।

शुक्ल पक्ष के सोमवार को सिद्ध योग में तीन गोमती चक्र चांदी के तार में एक साथ बांधें और उन्हें हर समय अपने साथ रखें, पदोन्नति के साथ-साथ व्यवसाय में भी लाभ होगा।

नौकरी जाने का खतरा हो तो

पांच ग्राम डली वाला सुरमा लें ! उसे किसी वीरान जगह पर गाड दें ! ख्याल रहे कि जिस औजार से आपने जमीन खोदी है उस औजार को वापिस न लायें ! उसे वहीं फेंक दें दूसरी बात जो ध्यान रखने वाली है वो यह है कि सुरमा डली वाला हो और एक ही डली लगभग 5 ग्राम की हो ! एक से ज्यादा डलियां नहीं होनी चाहिए ।

 

व्यापार में सफलता के लिए

नया कारोबार, नई दुकान या कोई भी नया कार्य करने से पूर्व मिट्टी के पांच पात्र लें जिसमें सवाकिलो सामान आ जाएं। प्रत्येक पात्र में सवा किलो सफेद तिल, सवा किलो पीली सरसों, सवा किलो उड़द, सवा किलो जौ, सवा किलो साबुत मूंग भर दें। मिट्टी के ढक्कन से ढंक कर सभी पात्र को लाल कपड़े से मुंह बांध दें और अपने व्यवसायकि स्थल पर इन पांचों कलश को रख दें। वर्ष भर यह कलश अपनी दुकान में रखें ग्राहकों का आगमन बड़ी सरलता से बढ़ेगा और कारोबारी समस्या का निवारण भी होगा। एक वर्ष के बाद इन संपूर्ण पात्रों को अपने ऊपर से 11 बार उसार कर बहते पानी में प्रवाह कर दें। और नये पात्र भरकर रख दें।

कारोबारी सफलता के लिए प्रत्येक अमावस्या के दिन अपने पूरे घर की सुंदर सफाई करें। तत्पश्चात परिवार के सभी सदस्य नहा धोकर शुद्ध वस्त्र धारण करके एक जगह एकत्रित होकर अपने बीच में चौकी रखकर उस पर लाल वस्त्र बिछा दें। वस्त्र के ऊपर 11 मुट्ठी मसूर की दाने रखकर उसके ऊपर एक चौमुखा दीपक प्रज्ज्वलित कर रख दें। तत्पश्चात घर के सभी सदस्य सुंदर काण्ड का पाठ करें। संपूर्ण कष्टों से छुटकारा मिलेगा।

अगर कारोबार में अनावश्यक परेशानी आ रही हो, लाभ मार्ग अवरोध हो रहा हो तो हर रोज शाम को गोधूलि वेला में यानि साढ़े पांच से छ: बजे के बीच में अपने पूजा स्थान में श्री महालक्ष्मी की तस्वीर स्थापित करके या तुलसी के पौधे के सामने में गो घृत का दीपक जलाएं। दीपक प्रज्ज्वलित करने के बाद उसक अंदर अपने इष्ट देव का ध्यान करते हुए एक इलायची डाल दें। ऐसा नियमित 186 दिन करने से व्यापार में लाभ होगा। दीपक और इलायची हमेशा नया प्रयोग में लाएं।

यदि आपके व्यवसाय में बाधाएं चल रही हों तो आपको अपने कार्यस्थल पर पीले रंग की वस्तुओं का प्रयोग करना चाहिए तथा पूजाघर में हल्दी की माला लटकानी चाहिए। भगवान लक्ष्मी-नारायण के मंदिर में लड्डू का भोग लगाना चाहिए।

अगर आपके व्यापार में मंदी आ गयी है या नौकरी में मंदी आ गयी है तो यह करें। किसी साफ़ शीशी में सरसों का तेल भरकर उस शीशी को किसी तालाब या बहती नदी के जल में डाल दें। शीघ्र ही मंदी का असर जाता रहेगा और आपके व्यापार में जान आ जाएगी।

व्यवसाय में मनोनुकूल लाभ की प्राप्ति नहीं हो रही हो तो किसी भी शनिवार के दिन नीले कपड़े 21 दानें रक्त गुंजा के बांधकर तिजोरी में रख दें। हर रोज धूप, दीप अवश्य दिखाएं। अपने इष्टदेव का ध्यान करें। ऐसा नियमित करने से व्यापार में लाभ मिलेगा और सफलता भी प्राप्त होगी।

कपूर और रोली जलाकर उसकी राख को पुडिया बनाकर अपने घर या दुकान के धन स्थान में रखें तो निश्चित ही लाभ बना रहेगा ।

ग्यारह गोमती चक्र और तीन लघु नारियलों की यथाविधि पूजा कर उन्हें पीले वस्त्र में बांधकर बुधवार या शुक्रवार को अपने दरवाजे पर लटकाएं तथा हर पूर्णिमा को धूप दीप जलाएं। यह क्रिया निष्ठापूर्वक नियमित रूप से करें, ग्राहकों की संख्या में वृद्धि होगी और बिक्री बढ़ेगी

घर मे धन की बरक्कत के लिये टोटका-सबसे छोटे चलने वाले नोट का एक त्रिकोण पिरामिड बनाकर घर के धन स्थान में रख दीजिये,जब धन की कमी होने लगे तो उस पिरामिड को बायें हाथ में रखकर दाहिने हाथ से उसे ढककर कल्पना कीजिये कि यह पिरामिड घर में धन ला रहा है,कहीं से भी धन का बन्दोबस्त हो जायेगा,लेकिन यह प्रयोग बहुत ही जरूरत में कीजिये।

यदि आपको अपने व्यापार ,नौकरी ,कार्य क्षेत्र में लगातार धन हानि होने लगे , आपको मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा हो लोग आपसे रुष्ट होते है तो आप अपने कार्यस्थल या अपने निवास स्थान में झाड़ू को किसी ऐसे स्थान में रखे की किसी भी बाहर वाले की सीधी निगाह उस पर न पड़े ।

किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार के दिन 1 तांबे का सिक्का, 6 लाल गुंजा लाल कपड़े में बांधकर प्रात: 11 बजे से लेकर 1 बजे के बीच में किसी सुनसान जगह में अपने ऊपर से 11 बार उसार कर 11 इंच गहरा गङ्ढा खोदकर उसमें दबा दें। ऐसा 11 बुधवार करें। दबाने वाली जगह हमेशा नई होनी चाहिए। इस प्रयोग से कारोबार में बरकत होगी, घर में धन रूकेगा।

जिन उद्योगपतियों या व्यापारियों को काफी प्रयास और अथक परिश्रम करने के बावजूद बिक्री में वृध्दि नहीं हो पा रहा हो तो यह उपाय शुक्ल पक्ष में गुरुवार से प्रारम्भ करें और प्रत्येक गुरुवार को इस क्रिया को दोहराते रहें। घर के मुख्य द्वार के एक कोने को गंगाजल से शुध्द कर लें या धो लें। शुध्द किए गए स्थान पर स्वस्तिक का चिह्न बनाएं और उस पर थोड़ा दाल और गुड़ रख दें। साथ ही एक घी का दीपक जला दें। ध्यान रहे कि स्वस्तिक का चिह्न हल्दी से ही बनाएं। स्वास्तिक बनाने के बाद उसको बार-बार नहीं देखना चाहिए। यह उपाय बहुत ही सरल है और इसका प्रभाव शीघ्र ही परिलक्षित होने लगता है।

किसी भी गुरु पुष्य नक्षत्र के दिन प्रात:काल नित्यकर्म से निवृत होकर स्नानोपरांत शंख पुष्पी की जड़ अपने घर में लेकर आएं इस जड़ को गंगाजल से पवित्र कर दें। पवित्र करने के उपरांत चांदी की डिब्बी में पीले चावल भरकर उसके ऊपर रख दें। श्रद्धानुसार धूप, दीप, नेवैद्य, पुष्प, अक्षत अर्पित कर पंचोपचार पूजन करें। उसके बाद इस डिब्बी को अपनी तिजोरी में रख दें। धन में वृद्धि और कारोबारमें लाभ होगा। हर गुरु पुष्य के दिन शंख पुष्पी की जड़ व चांदी की डिब्बी बदल दें। पहले वाली बहते पानी में प्रवाह कर दें।

कठिन परिश्रम व मेहनत करने के उपरांत लाभ की प्राप्ति नहीं हो रही हो तो प्रत्येक गुरुवार के दिन शुभ घड़ी में पीले कपड़े में 9 जोड़े चने की दाल, 9 पीले गोपी चंदन की डलियां, 9 गोमती चक्र इन सबको पोटली बनाकर किसी भी मंदिर में केले के पेड़ के ऊपर शाम के समय टांग दें। साथ ही एक घी का दीपक भी प्रज्ज्वलित कर लें। ऐसा 11 गुरुवार करने से धन की प्राप्ति होगी और व्यवसायिक समस्याओं का निवारण भी होगा

व्यवसाय में मनोनुकूल लाभ की प्राप्ति नहीं हो रही हो तो किसी भी शनिवार के दिन नीले कपड़े 21 दानें रक्त गुंजा के बांधकर तिजोरी में रख दें। हर रोज धूप, दीप अवश्य दिखाएं। अपने इष्टदेव का ध्यान करें। ऐसा नियमित करने से व्यापार में लाभ मिलेगा और सफलता भी प्राप्त होगी।

आप अपने व्यापार में अधिक पैसा प्राप्त करना चाहते हैं और चाहते हैं की आपके व्यापार की बिक्री बढ़ जाए तो आप वट वृक्ष की लता को शनिवार के दिन जाकर निमंत्रण दे आएं। (वृक्ष की जड़ के पास एक पान, सुपारी और एक पैसा रख आएं) रविवार के दिन प्रातः काल जाकर उसकी एक जटा तोड़ लाएं, पीछे मुड़कर न देखें। उस जटा को घर लाकर गुग्गल की धूनी दें तथा 101 बार इस मंत्र का जप करें- ॐ नमो चण्ड अलसुर स्वाहा।

व्यापार में घाटा हो रहा हो या काम नहीं चल पा रहा हो, तो आप एक चुटकी आटा लेकर रविवार के दिन व्यापार स्थल या अपनी दुकान के मुख्य द्वार के दोनों ओर थोड़ा-थोड़ा छिड़क दें, साथ में कहें- जिसकी नजर लगी है उसको लग जाये। बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला। यह क्रिया शुक्ल पक्ष में ही करें। संभव हो तो प्रयत्न करें कि इस क्रिया को करते हुए आपको कोई न देखे। गुप्त रूप से यह क्रिया करने पर व्यापार का घाटा दूर होने लगता है। इसके अलावा व्यापार स्थल में मकडिय़ों के जाले व्यापार की वृद्घि को रोकते हैं। अत: व्यापार में बरकत के लिए प्रत्येक शनिवार को दुकान की सफाई आदि करते समय मकड़ी के जालों को अवश्य हटा देना चाहिए।

हर रोज प्रात:काल नित्यकर्म से निवृत्त होकर स्नानोपरांत तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें थोड़ी सी रोली डालकर ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नम:॥ मंत्र का जाप करते हुए तुलसी के पौधे में जल चढ़ाएं। शाम को गाय के शुद्ध देसी घी का दीपक जलांए और इसी मंत्र की पांच माला जाप करें।

  व्यापार में वृद्धि के लिये

किसी भी शुक्ल पक्ष की शुक्रवार को सवा किलो काले चने भिगो दें। इसे अगले दिन सरसों के तेल में बना लें इसके अब तीन हिस्से कर लें। एक हिस्सा शनिवार को ही घोड़े या भैंस को खिला दें, एक हिस्सा किसी कोढी या अंग विहीन भिकारी को दे आये तथा एक हिस्सा अपने सिर से उलटा फेर कर इसे एक दोने में रख कर किसी चौराहे पर रख दें ऐसा प्रयोग 40 शनिवार को करें।

दुकान की बिक्री बढ़ाने के लिए-घर या दुकान के दरवाजे पर सफ़ेद सरसों रखने से दुकान में बिक्री करते है।

बिक्री बढाने के लिये 11 गुरूवार को अपने व्यापार स्थल के मुख्य द्वार पर हल्दी से स्वस्तिक बना लें। इस पर थोड़ी चने की दाल एवं गुड रख दें। अगले सप्ताह इस सामग्री को वहां से हटा कर किसी मन्दिर में चढ़ा दें।

घर या कार्यालय को नज़र से बचाने के लिए-घर में या कार्यालय में 6 मोर पंख रखें इससे आपके घर व कार्यालय पर किसी की नजर नहीं लगेगी

एक पीपल का पत्ता शनिवार को तोड़ कर घर ले आयें। उसे गंगा जल से अच्छी तरह धो लें। इसको 21 बार गायत्री मंत्र से अभिमंत्रित कर इसे अपने कैश बाक्स में रखें। ऐसा हर शनिवार को करें। नया पत्ता रखने पर पुराना पत्ता वहां से हटा लें। इस जल में बहा दें या पीपल पर चढ़ा दें।

शुक्ल पक्ष में किसी भी दिन अपनी फैक्ट्री या दुकान के दरवाजे के दोनों तरफ बाहर की ओर थोडा सा गेहूं का आटा रख दें ! ध्यान रहे ऐसा करते हुए आपको कोई देखे नही ।

पूजा घर में अभिमंत्रित श्र्री यंत्र रखें ।

यदि आप व्यवसायी हैं, पुराने उद्योग के चलते नया उद्योग आरम्भ कर रहे हों तो अपने पुराने कारखाने से कोई भी लोहे की वास्तु ला कर अपने नए उद्योग स्थल में रख दें। जिस स्थान पर इस को रखेंगे वहां पर स्वस्तिक बनाएं और वहां पर थोड़े से काले उडद रखें उसके ऊपर उस वस्तु को रख दें। ऐसा करने से नवीन उद्योग भी पुराने उद्योग की तरह सफलता पूर्वक चल पड़ता है।

शुक्ल पक्ष के सोमवार को सिद्ध योग में तीन गोमती चक्र चांदी के तार में एक साथ बांधें और उन्हें हर समय अपने साथ रखें, पदोन्नति के साथ-साथ व्यवसाय में भी लाभ होगा।

यदि आपका व्यवसाय तकनीकी क्षेत्र का है और आपके व्यवसाय में हमेशा कोई न कोई मशीन बहुत जल्दी खराब होती हो तो यह उपाय बहुत ही लाभदायक रहेगा। किसी भी माह के प्रथम गुरुवार के दिन हल्दी, कुंकुम और केसर की स्याही बनाकर नौ इंच सफेद कच्चे धागे को रंग लें। तत्पश्चात उसमें नौ गांठ लगा दें। मशीन के ऊपर उसी स्याही से स्वास्तिक बनाकर उस धागे को बांध दें। मशीन खराब नहीं होगी और कर्मचारी में मन लगाकर काम करेंगे

यदि आपके परिवार में हमेशा कलह रहता हो पारिवारिक सदस्य सुख शांति से न रहते हो तो शनिवार के दिन सुबह काले कपड़े में जटा वाले नारियल को लपेटकर उस पर काजल की 21 बिंदी लगा लें। और घर के बाहर लटका दें। हमेशा घर बुरी नजर से बच कर रहेगा और हमेशा सुख-शांति रहेगी।

वे लोग जो अपने व्यापार व नौकरी को लेकर हमेशा तनाव में रहते हैं। बार-बार अपना कारोबार बदलते है व बार-बार नौकरी बदलते है तथा कहीं पर भी स्थिर नहीं रह पाते हैं। उन्हें यह प्रयोग जरूर अजमाना चाहिए। 17 इंच लंबा काला रेशमी धागा ले उसे लाल चंदन, कुंकम व केसर को घोलकर उसे रंग लें। तत्पश्चात 'ॐ हं पवननंदनाय स्वाहा' मंत्र का जाप करते हुए आठ गांठ लगा दें। प्रत्येक गांठ पर एक सौ आठ पर इस मंत्र का जाप करें। तत्पश्चात इस अभिमंत्रित धागे को अपने कारोबार के मुख्य द्वार पर बांध दे। नौकरी से संबंधित लोगों को अपनी चेयर या मेज की दराज में रख ले या कुर्सी पर यह धागा बांध लें। कारोबार व नौकरी में अवश्य स्थिरता आ जायेगी।

 

शेयर में घाटा

शेयर व्यापार में नुकसान होने पर चमड़े के पर्स में कभी पैसे न रखें। सूर्यास्त के बाद दूध न पीएं। चांदी की चेन में ठोस चांदी की गोली सोमवार को शुद्ध मुहूर्त में पहनें। चांदी के गिलास में ही जल पीएं।

 

विवाह के लिए

शादी विवाह के लिये टोटका

किसी आदमी की शादी में परेशानी हो तो उसे शुक्ल पक्ष के प्रत्येक गुरुवार को पानी में एक चुटकी हल्दी पाउडर मिलाकर नहाना चाहिये तथा साथ ही ‘‘ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय’’ का जाप करते हुये केसर का तिलक लगाना चाहिये। इसके अलावा पीपल एवं केले के पेड़ में तांबे या पीतल के लोटे में शुद्ध जल लेकर इन्हें सींचना चाहिए तथा धूप-दीप, हल्दी गांठ, चने की दाल से पूजा करनी चाहिए। गुरुवार को केले नहीं खायें। र्साईं राम (शिरडी के बाबा) के दर्शन कर आशीर्वाद लें। विवाह जल्दी होगा।

कन्या के विवाह के लिए

यदि कन्या की शादी में कोई रूकावट आ रही हो तो पूजा वाले 5 नारियल लें ! भगवान शिव की मूर्ती या फोटो के आगे रख कर “ऊं श्रीं वर प्रदाय श्री नामः” मंत्र का पांच माला जाप करें फिर वो पांचों नारियल शिव जी के मंदिर में चढा दें ! विवाह की बाधायें अपने आप दूर होती जांयगी !

प्रत्येक सोमवार को कन्या सुबह नहा-धोकर शिवलिंग पर “ऊं सोमेश्वराय नमः” का जाप करते हुए दूध मिले जल को चढाये और वहीं मंदिर में बैठ कर रूद्राक्ष की माला से इसी मंत्र का एक माला जप करे ! विवाह की सम्भावना शीघ्र बनती नज़र आयेगी ।

यदि कन्या की शादी में कोई रूकावट आ रही हो तो पूजा वाले 5 नारियल लें ! भगवान शिव की मूर्ती या फोटो के आगे रख कर “ऊं श्रीं वर प्रदाय श्री नामः” मंत्र का पांच माला जाप करें फिर वो पांचों नारियल शिव जी के मंदिर में चढा दें ! विवाह की बाधायें अपने आप दूर होती जांयगी ।

वैवाहिक सुख के लिए

कन्या का विवाह हो जाने के बाद उसके घर से विदा होते समय एक लोटे में गंगाजल, थोड़ी सी हल्दी और एक पीला सिक्का डालकर उसके आगे फेंक दें, उसका वैवाहिक जीवन सुखी रहेगा।

ब्रहस्पतिवार या मंगलवार को सात गाँठ हल्दी तथा थोड़ा-सा गुड इसके साथ पीतल का एक टुकड़ा इन सबको मिलाकर पोटली में बांधें तथा ससुराल की दिशा में फेंक दें तो वहां हर प्रकार से शांति व सुख रहता है।

कन्या अपनी ससुराल में रहते हुए यह करें। मेहँदी तथा साबुत उरद जिस दिशा में वधु का घर हो, उसी दिशा में फेंकने से वर-वधु में प्रेम बढ़ता है।

सावन के महीने में जब पहली बरसात हो तो बहते पानी में विवाह करने से दुर्भाग्य दूर हो जाता है।

कन्या अपने हाथ से हल्दी की 7 साबुत गांठें, पीतल का एक टुकड़ा और थोड़ा-सा गुड़ ससुराल की तरफ फेंके, ससुराल में सुरक्षित और सुखी रहेगी।

 

मनपसंद  विवाह

मनपसंद लड़की से विवाह के लिए ठोस चांदी की चार छोटी गोलियां शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार को सफेद कपड़े में लपेट कर हमेशा अपने पास रखें। एक कप कच्चा दूध चीनी मिलाकर प्रतिदिन जामुन के वृक्ष की जड़ में डालें।

केला में गोरोचन मिलाकर लेप बनाएं। इस लेप को सिर पर लगाएं। माना जाता है कि ऐसा करने से व्यक्ति में आकर्षण शक्ति आ जाती है। नारियल, धतूरे के बीज, कपूर को पीस लें। इसमें शहद मिलाएं। नियमित इसका तिलक करने से जिसे आप प्यार करते हैं वह आपको छोड़कर नहीं जाता है।

भगवान विष्णु और लक्ष्मी की मूर्ति या फोटो के सम्मुख शुक्ल पक्ष में गुरुवार से '' ऊँ लक्ष्मी नारायणाय नमः।''मन्त्र की 3 माला प्रतिदिन स्फटिक की माला से जप करें और 3 महीनों तक हर गुरुवार को मंदिर में प्रसाद चढ़ायें।

कृष्ण मंदिर में बांसुरी और पान अर्पण से प्रेम की प्राप्ति होती है ।

यदि आप किसी को अपना बनाना चाहते हैं तो माँ दुर्गा की की पूजा करे माता को लाल रंग की ध्वजा चढ़ाएं व प्रेम में सफलता की मनोकामना मांगें।

शहद से रुद्राभिषेक करने से मनचाहा प्रेम मिलता है ।

सोलह सोमवार के ब्रत से योग्य, सुन्दर, सुशील और प्रेम करने वाला जीवन साथी मिलता है ।

प्रेम-विवाह में सफलता के लिए शुक्ल पक्ष में प्राण प्रतिष्ठत असली नेपाली गौरी-शंकर रुद्राक्ष, वाइट गोल्ड में धारण करें |

ओपल या हीरा रत्न धारण कर से प्रेम-संबंधों को विवाह तक पहुंचाने में सहायता मिलती है।

यदि प्रेमी/प्रेमिका में से कोई एक मांगलिक हैं और प्रेम-विवाह में बाधा आ रही है तो तो विवाह की लिए पुन: विचार करें नहीं तो मंगल दोष का तत्काल निवारण अवश्य ही कर लें, अन्यथा जीवन भर पछताना पड़ सकता है।

 

शादी विवाह में विघ्न न पडने देने के लिये टोटका

शादी वाले दिन से एक दिन पहले एक ईंट के ऊपर कोयले से "बाधायें" लिखकर ईंट को उल्टा करके किसी सुरक्षित स्थान पर रख दीजिये,और शादी के बाद उस ईंट को उठाकर किसी पानी वाले स्थान पर डाल कर ऊपर से कुछ खाने का सामान डाल दीजिये,शादी विवाह के समय में बाधायें नहीं आयेंगी।

 

शादी विवाह के लिये टोटका

किसी आदमी की शादी में परेशानी हो तो उसे शुक्ल पक्ष के प्रत्येक गुरुवार को पानी में एक चुटकी हल्दी पाउडर मिलाकर नहाना चाहिये तथा साथ ही ‘‘ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय’’ का जाप करते हुये केसर का तिलक लगाना चाहिये। इसके अलावा पीपल एवं केले के पेड़ में तांबे या पीतल के लोटे में शुद्ध जल लेकर इन्हें सींचना चाहिए तथा धूप-दीप, हल्दी गांठ, चने की दाल से पूजा करनी चाहिए। गुरुवार को केले नहीं खायें। र्साईं राम (शिरडी के बाबा) के दर्शन कर आशीर्वाद लें। विवाह जल्दी होगा।

 

आपको कभी छोड़कर नहीं जाएगा कोई

नारियल, धतूरे के बीज, कपूर को पीस लें। इसमें शहद मिलाएं। नियमित इसका तिलक करने से जिसे आप प्यार करते हैं वह आपको कभी छोड़कर नहीं जाएगा।

 

सुखी दांपत्या के टोटके

  1. यदि कोई स्त्री रात्रि के समय एक चुटकी सिंदूर अपने पति के सिरहाने रख ले और प्रातः बिस्तर से उठने से पहले ही वह सिंदूर अपनी माँग में भर ले तो दाम्पत्या जीवन सुखी बना रहेगा |
  2. यदि पत्नी हमेशा अपने हाथ में पीली चूड़ी पहेंन के रखे तो दाम्पत्या जीवन सुखी रहेगा |
  3. यदि कोई स्त्री दान करना चाहे तो दान की सामग्री में लाल सिंदूर के साथ इत्र की शीशी , चने की दाल तथा केसर अवश्य रखे| इससे पति की आयु में लंबी होती है|
  4. यदि विवाहिता प्रतिदिन दुर्गा चालीसा का पाठ करें तो उस स्त्री का परिवार खुशहाल व दाम्पत्या प्रेम अटूट ब्ना रहेगा ।
  5. हब ब घर में कोई खाने पीने की वस्तु आए उसे पहले भगवान के च्रनो में अर्पित करे|गृहस्त जीवन खुशहाल बना रहेगा ।
  6. बुधवार को मिट्टी के बने एक शेर को उसके गले में लाल चुन्नी बांधकर और लाल टीका लगाकर माता के मंदिर में रखें और माता को अपने परिवार की सभी समस्याएं बताकर उनसे शांति बनाए रखने की विनती करें। यह क्रिया निष्ठापूर्वक करें, परिवार में शांति कायम होगी।
  7. अगर आप अपने घर में खुशहाली लाना चाहते हैं व शांति बनाये रखना चाहते हैं तो यह उपाय करें-शुक्ल पक्ष के बृहस्पति को यह क्रिया शुरू करें तथा 11 बृहस्पतिवार तक लगातार करें. घर या व्यापार स्थल के मुख्य द्वार के एक कोने को गंगा जल से धो लें. इसके बाद स्वास्तिक बनाएं. उस पर चने की दाल तथा थोड़ा-सा गुड़ रख दे. इसके बाद स्वास्तिक को बार-बार देखें. अगर वह खराब हो जाए तो सामान को इकट्ठा करके जल प्रवाह करें.11 बृहस्पतिवार के बाद गणेश जी को सिंदूर लगाकर उनके सामने पांच लड्डू रखें तथा घर में खुशहाली व शांति का माहौल बनने लगेगा
  8. अगर पति या प्रेमी का पत्नी या प्रेमिका के प्रति प्यार कम हो गया हो तो श्री कृष्ण का स्मरण कर तीन इलायची अपने बदन से स्पर्श करती हुई शुक्रवार के दिन छुपा कर रखें। जैसे अगर साड़ी पहनतीं हैं तो अपने पल्लू में बांध कर उसे रखा जा सकता है और अन्य लिबास पहनती हैं तो रूमाल में रखा जा सकता है। शनिवार की सुबह वह इलायची पीस कर किसी भी व्यंजन में मिलाकर पति या प्रेमी को खिला दें। मात्र तीन शुक्रवार में स्पष्ट फर्क नजर आएगा।
  9. चक्की पर गेहूं पिसवाने जाते समय तुलसी के ग्यारह पत्ते गेहूं में डाल दें। एक लाल थैली में केसर के २ पत्ते और थोड़े से गेहूं डालकर मंदिर में रखकर फिर इन्हें भी पिसवाने वाले गेंहू में मिला दें, धन में बरकत होगी और घर में स्थ्रि लक्ष्मी का वास होगा। आटा केवल सोमवार या शनिवार को पिसवाएं।
  10. घर में सुख-शान्ति के लिए मिट्टी का लाल रंग का बन्दर, जिसके हाथ खुले हो, घर में सूर्य की तरफ़ पीठ करके रखें, ऐसा रविवार को करें।

     

गृह कलह शान्ति हेतु अन्य टोटके

रोजाना सुबह जागकर अपने स्वर को देखना चाहिये, नाक के बायें स्वर से जागने पर फौरन बिस्तर छोड कर अपने काम में लग जाना चाहिये, अगर नाक से दाहिना स्वर चल रहा है तो दाहिनी तरफ बगल के नीचे तकिया लगाकर दुबारा से सो जाना चाहिये, कुछ समय में बायां स्वर चलने लगेगा, सही तरीके से चलने पर बिस्तर छोड देना चाहिये।

प्रतिदिन आटा गूथते समय एक चुटकी नकम एवं एक चुटकी बेसन उसमें मिला लें।

गेंहूँ चक्की पर पिसने जाने से पहले उसमें थोड़े से चने मिला दें तथा केवल सोमवार एवं शनिवार को ही गेंहूँ पिसवाऐं।

दुर्गा सप्तशती का पाठ नवरात्री में विद्वान पण्डित से कराऐं।

चीटियों का शक्कर खिलाऐं ।

घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में शौंच का स्थान न रखें एवं उस स्थान को साफ, और भार युक्त वास्तु से दूर रखें।

जो ग्रह कलह कारक हों उनकी वस्तुओं का दान करें।

मुख्यद्वार के पदे के नीचे कुछ धुधंरू बांध दे इसके संगीत से धर मे प्रसन्नता का वातावरण रहेगा।

प्रतिदिन सवेरे थोड़ा सा दुध और पानी मिलाकर धर मे पोछा लगाने से मानसिक षांति एवं सुख मिलेगा।

अगर आपका दाम्पत्य जीवन अशांत है तो आप रात्री में शय न करते समय पत्नी अपने पलंग पर देशी कपूर तथा पति के पलंग पर कामिया सिन्दूर रखें. प्रातः सूर्यदे के समय पति देशी कपूर को जला दें और पत्नी सिन्दूर को भवन में छिटका दें। इस टोटके से कुछ ही दिनों में कलह समाप्त हो जाती है।

ना चाहते हुए भी आपसी कलह हो रहा हो तो लाल कपड़े में मसूर की दाल, रक्त चंदन एवं पांच छोटे नारियल ले लें और क्लेश मुक्ति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करें। अब इस पोटली को गंगा में विसर्जित कर दें। ऐसा 11 मंगलवार तक करने से दाम्पत्य सुख में वृद्धि होने लगती है।

 

पति के किसी अन्य महिला से सम्बन्ध

आपको यदि शक हो की आपके पति के किसी अन्य महिला से सम्बन्ध हैं तो आप इसके लिए रात में थोडा कपूर अवश्य जलाया करें इससे यदि सम्बन्ध होंगे तो छूट जायेंगे|

रविवार की रात में सोते समय कुछ सिन्दूर बिस्तर पर पति के सोने वाले हिस्से की और बिखरा दें तथा प्रात: नहा कर माँ पार्वती का नाम लेकर उससे अपनी मांग भर लें|

जिस महिला से आपके पति का संपर्क है उसके नाम के अक्षर के बराबर मखाने लेकर प्रत्येक मखाने पर उसके नाम का अक्षर लिख दें|उस औरत से पति का छुटकारा पाने की ईशवर से प्रार्थना करते हुए उन सारे मखानो को जला दें तथा किसी भी प्रकार से उसकी काली भभूत को पति के पैर के नीचे आने की व्यवस्था करें

किसी अन्य महिला के पीछे आपके पति यदि आपका अपमान करते हैं तो किसी भी गुरूवार को तीन सो ग्राम बेसन के लड्डू ,आटेके दो पेड़े,तीन केले व इतनी ही चने की गीली दाल लेकर किसी गाय को खिलाये जो अपने बछड़े को दूध पिला रही हो|उसे खिला कर यह निवेदन करें की हे माँ,मैंने आपके बच्चे को फल दिया आप मेरे बच्चे को फल देना|कुछ ही दिन में आपके पति रस्ते में आ जायेंगे|

शराब का  छोड़ना

किसी भी रविवार को एक शराब की बोतल लाए, यह उसी ब्रांड की होनी चाहिए जिसका आपके पति (या अन्य परिजन) प्रयोग करते हैं। इस बोतल को रविवार के ही दिन अपने निकट के किसी भी भैरव बाबा के मंदिर में चढ़ा दें और पुजारी को कुछ रूपए देकर उससे वह बोतल वापिस खरीद लें। पति के सोते समय अथवा जब वह नशे में हो, उस पूरी बोतल को उनके ऊपर 21 बार उसारते हुए "ॐ नमः भैरवाय" मंत्र का जाप करें। इसके बाद बोतल को शाम को किसी भी पीपल के पेड़ के नीचे छोड़ आएं। इस उपाय से कुछ ही दिनों में शराबी की शराब पूरी तरह से छूट जाएगी।

यह भी पहले उपाय की ही तरह है परन्तु थोड़ा सा जटिल हैं इसमें आप एक शराब की बोतल खरीद कर लाएं और शराब के लती परिजन को सोते समय उन पर से 21 बार उसार लें। इसके बाद एक अन्य बोतल में आठ सौ ग्राम सरसों का तेल लें और दोनों को आपस में मिला लें। दोनों बोतलों के ढक्कन बंद कर किसी ऐसे स्थान पर उल्टा गाढ़ दें जहां से पानी बहता हो ताकि दोनों बोतलों के ऊपर से जल लगातार बहता रहे। इस उपाय को करने के कुछ ही दिनों में व्यक्ति को शराब से घृणा हो जाती है।

यदि कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा शराब पीता है तो उसकी पत्नी मंगल या शनिवार को चरखा चलाए।जो व्यक्ति जरूरत से ज्यादा शराब का सेवन करता है तो उसकी पत्नी अपने पैरों के बिच्छुए को पानी से धोकर तथा शराब की बोतल में से थोड़ी सी शराब लेकर उसमें अपने बिच्छुए डाल दे। त्रयोदशी या पूर्णमाशी के दिन वह शराब निकाल कर दूसरी किसी शराब की बोतल में डाल दें। ऐसा पांच मंगलवार या शनिवार करने से शराब पीने की लत छूट जाती है।जो जातक शराब का सेवन अधिक करता है तो उसके लिए सात पताशे लेकर प्रत्येक पताशे में सरसों के तेल की दो-चार बूंदे डालकर फिर बताशे को हाथ से मसलकर घर से बाहर कहीं दूर जाकर फेंक दें। ऐसा ११ दिन लगातार करने से शराब पीने की लत छूट जाती है।

जब शराब पीने की इच्छा हो तब किशमिश का १-१ दाना मुंह में डालकर चूसें किशमिश का शरबत पीने से भी दिमाग को ताकत मिलेगी और धीरे-धीरे शराब छोड़ने की क्षमता आ जायेगी l

सोने-चांदी का काम करने वाले सोनारों के पास से शुद्ध गंधक का तेज़ाब यानि कि सल्फ़्युरिक एसिड ले आइए और आप जो शराब पीने जा रहे हैं उसके बने हुए पैग में चार बूंद यह तेज़ाब डाल दीजिए और जैसे सेवन करते है वैसे ही पीजिए और आप देखेंगे कि धीरे-धीरे आपकी शराब पीने की इच्छा अपने आप ही कम होने लगी है । इसी क्रम में आप एक दिन खुद ही शराब के प्रति अरुचि महसूस करने लगेंगे और पीना अपने आप छूट जाएगा ,ध्यान रखिए कि आप और कोई उपाय न करें बस खाने पर ध्यान दें कि स्वास्थ्यवर्धक आहार लें ।

शिमला मिर्च(कैप्सिकम) जो कि मोटी-मोटी होती हैं व खाने में तीखी नहीं होती व सब्जी बनाने में प्रयोग करी जाती हैं ,ले लीजिए और उनका जूसर से रस निकाल लीजिए व इस रस का सेवन दिन में दो बार आधा कप नाश्ते या भोजन के बाद करें । आप चमत्कारिक रूप से पाएंगे कि आपकी शराब की तलब अपने आप घटने लगी है और एक दिन आप खुद ही पीने से इंकार कर देते हैं चाहे कोई कितना भी दबाव क्यों न डाले ।

जंगली कौवे के पंख को पानी में हिलाकर शराबी को पंख वाला पानी दिन पिलाने से भी शराबी शराब छोड़ देता है

कोई काम न बन रहा हो

सिन्दूर लगे हनुमान जी की मूर्ति का सिन्दूर लेकर सीता जी के चरणों में लगाएँ। फिर माता सीता से एक श्वास में अपनी कामना निवेदित कर भक्ति पूर्वक प्रणाम कर वापस आ जाएँ। इस प्रकार कुछ दिन करने पर सभी प्रकार की बाधाओं का निवारण होता है।

कोई काम न बन रहा हो तो 19 शनिवार तक आप पीपल के पेड़ में धागा लपेटें और तिल के तेल का ही दीया जलाएं। इस दीये में 11 दानें काले उड़द जरूर रखें ।

रविवार को छोड़कर हर दिन तुलसी के पौधे में जल चढ़ाएं और सूर्य भगवान को अर्ध्य देकर ही काम के लिए बाहर निकलें, सारे काम बनेंगे।

किसी कार्य की सिद्धि के लिए जाते समय घर से निकलने से पूर्व ही अपने हाथ में रोटी ले लें। मार्ग में जहां भी कौए दिखलाई दें, वहां उस रोटी के टुकड़े कर के डाल दें और आगे बढ़ जाएं। इससे सफलता प्राप्त होती है।

आज कल हर आदमी किसी न किसी कारण से परेशान है ! कारण कोई भी हो आप एक तांबे के पात्र में जल भर कर उसमें थोडा सा लाल चंदन मिला दें ! उस पात्र को सिरहाने रख कर रात को सो जांय ! प्रातः उस जल को तुलसी के पौधे पर चढा दें ! धीरे-धीरे परेशानी दूर होगी ।

अमावस्या के दिन पीले कपड़े का त्रिकोना झंडा बना कर विष्णु भगवान के मंदिर के ऊपर लगवा दें, कार्य सिद्ध होगा।

किसी शनिवार को, किसी भी शुभ योग/शुभ चौघड़‍िया में शाम के वक्त अपनी लंबाई के बराबर लाल रेशमी सूत नाप लें। फिर एक पत्ता बरगद का तोड़ें। उसे स्वच्छ जल से धोकर पोंछ लें। तब पत्ते पर अपनी कामना रूपी नापा हुआ लाल रेशमी सूत लपेट दें और पत्ते को बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। इस प्रयोग से सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं, कामनाओं की पूर्ति होती है सबसे महत्वपूर्ण आपका भाग्य चमकने लगेगा।

आप चाहते हैं की आपके द्वारा किये गए कार्य सफल हो लेकिन कार्य के प्रारम्भ होते ही उसमें विध्न आ जाते हैं और वह असफल हो जाते हैं इसके लिए आप यह करें: प्रातःकाल कच्चा सूत लेकर सूर्य के सामने मुंह करके खड़े हो जाएं। फिर सूर्य देव को नमस्कार करके 'ॐ हीं घ्रणि सूर्य आदित्य श्रीम' मंत्र बोलते हुए सूर्य देव को जल चढ़ाएं। जल में रोली, चावल, चीनी तथा लाल पुष्प दाल लें। इसके पश्चात कच्चे सूत को सूर्य देव की तरफ करते हुए गणेशजी का स्मरण करते हुए सात गाँठ लगाएं। इसके पश्चात इस सूत को किसी खोल में रखकर अपनी कमीज की जेब में रख लें, आपके बिगड़े कार्य बनाने लगेंगे।

काम के लिए घर से बाहर निकल रहे हों

काम में सफलता प्राप्ति के लिए इस उपाय को अपना सकते हैं। यदि काम नहीं बन रहा हो तो घर से निकलते वक्त उल्टी दिशा में चार कदम आगे बढ़ाएं और फिर मुड़कर अपने रास्ते पर निकल जाएं।

किसी ऐसे काम के लिए घर से बाहर निकल रहे हों, जिसकी सफलता प्राप्ति के लिए आप बेचैन हैं तो निकलते वक्त घर के मुख्य दरवाजे पर काली मिर्च रखें और उसी काली मिर्च पर पैर रखकर घर से बाहर अपने कदम बढ़ाएं। ध्यान रखिए कि इस काम के निमित्त एक बार घर से बाहर निकलने के बाद दोबारा किसी भूली-बिसरी चीजों के लिए घर में प्रवेश न करें। क्योंकि, ऐसा करने से इस टोटके का प्रभाव लगभगल खत्म हो जाता है।

किसी कार्य की सिद्धि के लिए जाते समय घर से निकलने से पूर्व ही अपने हाथ में रोटी ले लें। मार्ग में जहां भी कौए दिखलाई दें, वहां उस रोटी के टुकड़े कर के डाल दें और आगे बढ़ जाएं। इससे सफलता प्राप्त होती है।

रविवार को पान का पत्ता साथ रखकर जायें।सोमवार को दर्पण में अपना चेहरा देखकर जायें।मंगलवार को मिष्ठान खाकर जायें।बुधवार को हरे धनिये के पत्ते खाकर जायें।गुरूवार को सरसों के कुछ दाने मुख में डालकर जायें।शुक्रवार को दही खाकर जायें।शनिवार को अदरक और घी खाकर जाना चाहिये।

किसी विशेष कार्य के लिए घर के निकलते समय एक साबुत नीबू लेकर गाय के गोबर में दबा दें तथा उसके ऊपर थोड़ा-सा कामिया सिन्दूर छिड़क दें तथा कार्य बोलकर चले जाएं तो कार्य निश्चित ही बन जाता है।

इच्छा के विरूद्ध कार्य करना पड़ रहा हो तो

अगर आपको किसी कारणवश कोइ कार्य अपनी इच्छा के विपरीत करना पड़ रहा हो तो आप कपूर और एक फूल वाली लौंग एक साथ जलाकर दो-तीन दिन में थोड़ी-थोड़ी खा लें। आपकी इच्छा के विपरीत कार्य होना बंद हो जाएगा।

मान सम्मान प्राप्ति के उपाय

  1. ज्येष्ठा नक्षत्र में जामुन के वृक्ष की जड़ लाकर अपने पास संभल कर रखने से उस व्यक्ति को समाज से / प्रसाशन से अवश्य ही मान सम्मान की प्राप्ति होती है ।
  2. समाज में उचित मान सम्मान प्राप्ति के लिए रात में सोते समय सिरहाने ताम्बे के बर्तन में जल भर कर उसमें थोड़ा शहद के साथ कोई भी सोने /चाँदी का सिक्का या अंगूठी रख लें फिर सुबह उठकर प्रभु का स्मरण करने के बाद सबसे पहले बिना कुल्ला किये उस जल को पी लें ...जल्दी ही आपकी यश ,कीर्ति बड़ने लगेगी ।
  3. यदि आप चाहते हैं कि आपके कार्यों की सर्वत्र सराहना हो, लोग आपका सम्मान करें, आपकी यश कीर्ति बड़े तो रात को सोने से पूर्व अपने सिरहाने तांबे के बर्तन में जल भरकर रखें और प्रात:काल इस जल को अपने ऊपर से सात बार उसार करके किसी भी कांटे वाले पेड़ की जड़ में डाल दें। ऐसा नियमित 40 दिन तक करने से आपको अवश्य ही लाभ मिलेगा।
  4. गले, हाथ या पैर में काले डोरे को पहनने से व्यक्ति को समाज में सरलता से मान सम्मान की प्राप्ति होती है, उसे हर क्षेत्र में विजय मिलती है।
  5. रात को सोते समय अपने पलंग के नीचे एक बर्तन में थोड़ा सा पानी रख लें, सुबह वह पानी घर के बाहर डाल दें इससे रोग, वाद-विवाद, बेइज्जती, मिथ्या लांछन आदि से सदैव बचाव होता रहेगा ।

    समाज में उचित मान सम्मान प्राप्ति के लिए रात में सोते समय सिरहाने ताम्बे के बर्तन में जल भर कर उसमें थोड़ा शहद के साथ कोई भी सोने /चाँदी का सिक्का या अंगूठी रख लें फिर सुबह उठकर प्रभु का स्मरण करने के बाद सबसे पहले बिना कुल्ला किये उस जल को पी लें ...जल्दी ही आपकी यश ,कीर्ति बड़ने लगेगी ।

  6.  

मकान, दुकान या प्रापर्टी बेचने का उपाय

  1. बाजार से 86 (छियासी) साबुत बादाम (छिलके सहित) ले आईए ! सुबह नहा-धो कर, बिना कुछ खाये, दो बादाम लेकर मन्दिर जाईए ! दोनो बादाम मन्दिर में शिव-लिंग या शिव जी के आगे रख दीजिए ! हाथ जोड कर भगवान से प्रापर्टी को बेचने की प्रार्थना कीजिए और उन दो बादामों में से एक बादाम वापिस ले आईए ! उस बादाम को लाकर घर में कहीं अलग रख दीजिए ! ऐसा आपको 43 दिन तक लगातार करना है ! रोज़ दो बादाम लेजाकर एक वापिस लाना है ! 43 दिन के बाद जो बादाम आपने घर में इकट्ठा किए हैं उन्हें जल-प्रवाह (बहते जल, नदी आदि में) कर दें ! आपका मनोरथ अवश्य पूरा होगा ! यदि 43 दिन से पहले ही आपका सौदा हो जाय तो भी उपाय को अधूरा नही छोडना चाहिए ! पूरा उपाय करके 43 बादाम जल-प्रवाह करने चाहिए ! अन्यथा कार्य में रूकावट आ सकती है !

मकान खाली कराने हेतु

शनिवार की शाम को भोजपत्र पर लाल चंदन से किरायेदार का नाम लिखकर शहद में डुबो दें। संभव हो, तो यह क्रिया शनिश्चरी अमावस्या को करें। कुछ ही दिनों में किरायेदार घर खाली कर देगा। ध्यान रहे, यह क्रिया करते समय कोई टोके नहीं।

 

मुकदमें अथवा किसी भी प्रकार के वाद विवाद में सफलता के उपाय

  1. मूँगा-मुकदमें अथवा किसी भी प्रकार के वाद विवाद में सफलता हेतु लाल ध् सिंदूरी मूँगा त्रिकोण की आक्रति का सोने या तांबे मिश्रित अंगूठी में बनवाकर उसे दाहिने हाथ के अनामिका उंगली में धारण करें , इससे सफलता की संभावना और अधिक हो जाती है ।
  2. हकीक पत्थर-यदि ग्यारह हकीक पत्थर लेकर किसी मंदिर में चदा दें और कहें की मैं अमुक कार्य में विजय होना चाहता हूँ तो निश्चय ही उस कार्य में विजय प्राप्त होती है ।
  3. मुकदमें में विजय प्राप्ति हेतु घर के पूजा स्थल में सिद्धि विनायक पिरामिड स्थापित करके प्रत्येक बुधवार को गन गणपतए नमो नमः मंत्र का जाप करें । जब भी अदालत जाएँ इस पिरामिड को लाल कपड़े में लपेटकर अपने साथ ले जाएँ ....आपको शीघ्र ही सफलता प्राप्त होगी ।
  4. जब आप पहली बार मुकदमें से वापिस आ रहे तो रास्ते में किसी भी मजार में गुलाब का पुष्प अर्पित करते हुए ही अपने निवास पर आएँ ।
  5. अपने अधिवक्ता को उसके काम की कोई भी वास्तु जैसे कलम उपहार में अवश्य ही प्रदान करें
  6. अपने कोर्ट के केस की फाइलें घर में बने मंदिर धार्मिक स्थान में रखकर ईश्वर से अपनी सफलता, अपनी रक्षा के लिए प्रार्थना करें ।
  7. यदि आपका किसी के साथ मुकदमा चल रहा हो और आप उसमें विजय पाना चाहते हैं तो थोडे से चावल लेकर कोर्ट/कचहरी में जांय और उन चावलों को कचहरी में कहीं पर फेंक दें ! जिस कमरे में आपका मुकदमा चल रहा हो उसके बाहर फेंकें तो ज्यादा अच्छा है ! परंतु याद रहे आपको चावल ले जाते या कोर्ट में फेंकते समय कोई देखे नहीं वरना लाभ नहीं होगा ! यह उपाय आपको बिना किसी को पता लगे करना होगा ।
  8. जब भी आप अदालत में जाएँ तो किसी भी हनुमान मंदिर में धूप अगरबत्ती जलाकर, लड्डू या गुड चने का भोग लगाकर एक बार हनुमान चालीसा और बजरंग बान का पाठ करके संकटमोचन बजरंग बलि से अपने मुकदमे में सफलता की प्रार्थना करें .........आपको निसंदेह सफलता प्राप्त होगी ।
  9. पांच गोमती चक्र जेब में रखकर कोर्ट में जाया करें, मुकदमे में निर्णय आपके पक्ष में होगा।
  10. यदि ग्यारह हकीक पत्थर लेकर किसी मंदिर में चदा दें और कहें की मैं अमुक कार्य में विजय होना चाहता हूँ तो निश्चय ही उस कार्य में विजय प्राप्त होती है ।
  11. वाद विवाद में सफलता हेतु आपको सात मुखी, पंचमुखी अथवा ग्यारह मुखी रुद्राक्ष धारण करने चाहियें ।
  12. किसी दुकान में जाकर किसी भी शुक्रवार को कोई भी एक स्टील का ताला खरीद लीजिए ! लेकिन ताला खरीदते वक्त न तो उस ताले को आप खुद खोलें और न ही दुकानदार को खोलने दें ताले को जांचने के लिए भी न खोलें ! उसी तरह से डिब्बी में बन्द का बन्द ताला दुकान से खरीद लें ! इस ताले को आप शुक्रवार की रात अपने सोने के कमरे में रख दें ! शनिवार सुबह उठकर नहा-धो कर ताले को बिना खोले किसी मन्दिर, गुरुद्वारे या किसी भी धार्मिक स्थान पर रख दें ! जब भी कोई उस ताले को खोलेगा आपकी किस्मत का ताला खुल जायगा !

 

कर्मचारी अक्सर छोड़कर जाते हैं

इसको रोकने के लिये आपको यदि रास्ते में पडी हुए कोई कील मिले, यदि वह दिन शनिवार हो तो अति उत्तम है। इसे भैंस के मूत्र से धो लें। जिस जगह के कर्मचारी ज्यादा छोड़ कर जाते हैं। वहां पर इस कील को गाद दें इस के फलस्वरूप कर्मचारी स्थिर हो जायेंगे। इस बात का भी ध्यान रखें कि आपके कर्मचारी इस प्रकार अपना काम करें कि काम करते समय उनका मुख पूर्व या उत्तर की ओर रहे।

 

पढाई में याददास्त बढाने का टोटका

बार-बार फेल होने पर -बच्चों का पढ़ाई में मन न लगता हो, बार-बार फेल हो जाते हों, तो यह सरल सा टोटका करें। शुक्ल पक्ष के पहले बृहस्पतिवार को सूर्यास्त से ठीक आधा घंटे पहले बड़ के पत्ते पर पांच अलग-अलग प्रकार की मिठाइयां तथा दो छोटी इलायचियां पीपल के वृक्ष के तले श्रद्धा भाव से रखें और अपनी शिक्षा के प्रति कामना करें। यदि उपाय माता पिता करें, तो बच्चे के लिए मन से प्रार्थना करें। पीछे मुड़ कर न देखें, सीधे अपने घर आ जाएं। इस प्रकार बिना क्रम टूटे तीन बृहस्पतिवार करें, बच्चे का पढ़ाई में मन लगने लगेगा व परीक्षा में अंक भी अच्छे आने लगेंगे।

याददास्त कोई हौवा नही है,कि याद होता नही है,और याद होता नही है तो पढाई बेकार हो जाती है,परीक्षा में परिणाम नकारात्मक आता है,और दिमाग का एक कौना मानने लगता है कि यह पढाई बेकार है,इसे छोड कर कोई जीवन यापन का काम कर लेना चाहिये,और इस बेकार के झमेले को छोड देना चाहिये, लेकिन नही अगर वास्तव मे आपको पढने का चाव है और आप चाहते है कि आपका परिणाम भी उन्ही लोगों की तरह से आये जैसे कि ब्रिलियेंन्ट बच्चों का आता है, तो इस टोटके को अंजवा लीजिये।

शाम को खाना खा कर बायीं करवट ढाई घंटे के लिये लेट जाइये,फिर ढाई घंटे दाहिनी करवट लेट जाइये, और ढाई घंटे उठकर सीधे बैठ कर पढना चालू कर दीजिये,यह क्रम लगातार चालू रखिये,देखिये कि जो टापिक कभी याद नही होते थे, इतनी अच्छी तरह से याद हो जायेंगे कि खुद को विश्वास ही नहीं होगा।

 

बच्चों का पढ़ाई में मन न लगता हो

शुक्ल पक्ष के पहले बृहस्पतिवार को सूर्यास्त से ठीक आधा घंटा पहले बड़ के पत्ते पर पांच अलग-अलग प्रकार की मिठाईयां तथा दो छोटी इलायची पीपल के वृक्ष के नीचे श्रद्धा भाव से रखें और अपनी शिक्षा के प्रति कामना करें। पीछे मुड़कर न देखें, सीधे अपने घर आ जाएं। इस प्रकार बिना क्रम टूटे तीन बृहस्पतिवार करें। यह उपाय माता-पिता भी अपने बच्चे के लिये कर सकते हैं।

परीक्षा में सफलता हेतु गणेश रुद्राक्ष धारण करें। बुधवार को गणेश जी के मंदिर में जाकर दर्शन करें और मूंग के लड्डुओं का भोग लगाकर सफलता की प्रार्थना करें।

शुक्ल पक्ष के पहले रविवार को इमली के २२ पत्ते ले आएं और उनमें से ११ पत्ते सूर्य देव को ¬ सूर्याय नमः कहते हुए अर्पित करें। शेष ११ पत्तों को अपनी किताबों में रख लें, पढ़ाई में रुचि बढ़ेगी।

 

सेहत / बीमारी  ठीक  करने के उपाय

सदा स्वस्थ बने रहने के लिये रात्रि को पानी किसी लोटे या गिलास में सुबह उठ कर पीने के लिये रख दें। उसे पी कर बर्तन को उल्टा रख दें तथा दिन में भी पानी पीने के बाद बर्तन (गिलास आदि) को उल्टा रखने से यकृत सम्बन्धी परेशानियां नहीं होती तथा व्यक्ति सदैव स्वस्थ बना रहता है।

  1. यदि बीमारी का पता नहीं चल पा रहा हो तो सात प्रकार के अनाज एक-एक मुट्ठी लेकर पानी में उबाल कर छान लें। छने व उबले अनाज (बाकले) में एक तोला सिंदूर की पुड़िया और ५० ग्राम तिल का तेल डाल कर कीकर (देसी बबूल) की जड़ में डालें या किसी भी रविवार को दोपहर १२ बजे भैरव स्थल पर चढ़ा दें।
  2. बदन दर्द हो तो मंगलवार को हनुमान जी के चरणों में सिक्का चढ़ाकर उसमें लगी सिंदूर का तिलक करें।पानी पीते समय यदि गिलास में पानी बच जाए, तो उसे अनादर के साथ फेंकें नहीं, गिलास में ही रहने दें। फेंकने से मानसिक अशांति होगी क्योंकि पानी चंद्रमा का कारक है।
  3. दर्द निवारक उपाय आपको हाथ-पैरों में अथवा कमर के निचले हिस्से में दर्द बना रहता है तो आप काले कपड़े में पीपल के वृक्ष की जड़ व लकड़ी को रखकर अपने बिस्तर के सिरहाने रख लें और साथ में पीपल वृक्ष की सेवा करते रहें। कुछ समय बाद आप दर्द से मुक्त हो जायेंगे।
  4. किसी रोग से ग्रसित होने पर सोते समय अपना सिरहाना पूर्व की ओर रखें ! अपने सोने के कमरे में एक कटोरी में सेंधा नमक के कुछ टुकडे रखें ! सेहत ठीक रहेगी ।
  5. कमर, गर्दन में तकलीफ रहती हो तो दोनों पैरों के अंगूठे में काला सफ़े द धागा बांधें।
  6. दुर्घटना या सजर्री का भय हो तो तांबें के बर्तन में गुड़ हनुमान जी के मन्दिर में देने से बचाव होता है और अगर सरसों के तेल का दीया वहीं जलाये और वहीं बैठ कर हनुमान चालीसा पढ़े।
  7. अगर परिवार में कोई परिवार में कोई व्यक्ति बीमार है तथा लगातार औषधि सेवन के पश्चात् भी स्वास्थ्य लाभ नहीं हो रहा है, तो किसी भी रविवार से आरम्भ करके लगातार 3 दिन तक गेहूं के आटे का पेड़ा तथा एक लोटा पानी व्यक्ति के सिर के ऊपर से उबार कर जल को पौधे में डाल दें तथा पेड़ा गाय को खिला दें। अवश्य ही इन 3 दिनों के अन्दर व्यक्ति स्वस्थ महसूस करने लगेगा। अगर टोटके की अवधि में रोगी ठीक हो जाता है, तो भी प्रयोग को पूरा करना है, बीच में रोकना नहीं चाहिए।
  8. अगर बीमार व्यक्ति ज्यादा गम्भीर हो, तो जौ का 125 पाव (सवा पाव) आटा लें। उसमें साबुत काले तिल मिला कर रोटी बनाएं। अच्छी तरह सेंके, जिससे वे कच्ची न रहें। फिर उस पर थोड़ा सा तिल्ली का तेल और गुड़ डाल कर पेड़ा बनाएं और एक तरफ लगा दें। फिर उस रोटी को बीमार व्यक्ति के ऊपर से 7 बार वार कर किसी भैंसे को खिला दें। पीछे मुड़ कर न देखें और न कोई आवाज लगाए। भैंसा कहाँ मिलेगा, इसका पता पहले ही मालूम कर के रखें। भैंस को रोटी नहीं खिलानी है, केवल भैंसे को ही श्रेष्ठ रहती है। शनि और मंगलवार को ही यह कार्य करें।
  9. यदि आपके परिवार में कोई व्यक्ति बीमार है तो अगर संभव हो तो उसे सोमवार को डॉक्टर को दिखाएँ और उसकी दवा की पहली खुराक भगवान शिव को अर्पित करके कुछ राशी भी चड़ा दें और रोगी व्यक्ति के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना करें , व्यक्ति के बहुत जल्दी ही ठीक हो जाने की सम्भावना बन जाती है ।
  10. हर पूर्णिमा को किसी भी शिव मंदिर में भगवान भोलेनाथ से अपने परिवार को निरोग रखने की प्रार्थना रखें ,तत्पश्चात मंदिर में और गरीबों में कुछ ना कुछ फल,मिठाई और नगद दान अवश्य दें ।
  11. रोगी व्यक्ति को मंगलवार और शनिवार किसी भी दिन हनुमान जी की मूर्ति से सिंदूर लेकर उसके माथे पर लगाने से उसका दिल मजबूत होता है और रोगी जल्दी स्वस्थ भी होता है ।
  12. यदि कोई बीमार व्यक्ति प्रात: काल एक गिलास पानी लेकर पूर्व दिशा की ओर मुंह करके खड़े होकर एँ मन्त्र का 21 बार जाप करके पी जाय एवं ईश्वर से अपने रोग को दूर करने के लिए प्रार्थना करें तो शीघ्र ही स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है। यह प्रयोग सोमवार से शुरू करके रविवार तक लगातार 7 दिन तक करना चाहिए ।
  13. अशोक के वृक्ष की ताजा तीन पत्तियों को प्रतिदिन प्रातः चबाने से चिंताओं से मुक्ति मिलती है और स्वास्थ्य भी उत्तम बना रहता है ।
  14. यदि किसी बीमार व्यक्ति का रोग ठीक ना हो रहा हो तो उसके तकिये के नीचे सहदेई और पीपल की जड़ रखने से बीमारी जल्दी ठीक होती है ।
  15. यदि किसी रोगी को मृत्युतुल्य पीड़ा हो रही हो , तो जौ के आटे ( बाजार में यह आसानी से उपलब्ध है ) में काले तिल और सरसों का तेल मिला

    व्यक्तिगत बाधा के लिए एक मुट्ठी पिसा हुआ नमक लेकर शाम को अपने सिर के ऊपर से तीन बार उतार लें और उसे दरवाजे के बाहर फेंकें। ऐसा तीन दिन लगातार करें। यदि आराम न मिले तो नमक को सिर के ऊपर वार कर शौचालय में डालकर फ्लश चला दें। निश्चित रूप से लाभ मिलेगा। हमारी या हमारे परिवार के किसी भी सदस्य की ग्रह स्थिति थोड़ी सी भी अनुकूल होगी तो हमें निश्चय ही इन उपायों से भरपूर लाभ मिलेगा।

    'नाशै रोग हरे सब पीड़ा' -अमावस्या या शनिवार के दिन सूर्यास्त के बाद हनुमान जी के मंदिर में पाकर प्रणाम करके उनके चरणों का सिंदूर ले आएँ।'

    मोटापा कम करने के लिए सरलतम टोटका अपनाएँ। रविवार के दिन अनामिक अँगुली में काला धागा बाँध ले। एवं उसको राँगे की अँगूठी से ढँक लो। अर्थात् पहन लो। आपको आश्चर्य होगा, मोटापा धीरे-धीरे कम हो जाएगा।

  16. यदि आपको भूख तो है लेकिन खाना मुंह में नहीं जा रहा हो तो प्रात:काल भोजन करते समय अपने भोजन में से एक रोटी निकाल दें उस रोटी को बरगद के पत्ते पर रखकर रोटी के उपर एक लौंग, एक इलायची, एक साबुत सुपारी और थोड़ी सी केसर डाल दे और अपने ऊपर से सात बार उसार कर किसी चौराहे पर चुपचाप रखकर आ जाएं। भूख लगने लगेगी मन प्रसन्न रहेगा।

  17. त्वचा संबंधी रोग केतु के दुष्प्रभाव से बढ़ते हैं। यदि त्वचा संबंधी घाव ठीक न हो रहा हो तो सायंकाल मिट्टी के नए पात्र में पानी रखकर उसमें सोने की अंगूठी या एनी कोइ आभूषण दाल दें। कुछ देर बाद उसी पानी से घाव को धोने के बाद अंगूठी निकालकर रख लें तथा पाने किसी चौराहे पर फेंक आएं। ऐसा तीन दिन करें तो रोग शीघ्र ठीक हो जाएगा।

लगातार बुखार आने पर

  1. यदि किसी को लगातार बुखार आ रहा हो और कोई भी दवा असर न कर रही हो तो आक की जड लेकर उसे किसी कपडे में कस कर बांध लें ! फिर उस कपडे को रोगी के कान से बांध दें ! बुखार उतर जायगा !
  2. इतवार या गुरूवार को चीनी, दूध, चावल और पेठा (कद्दू-पेठा, सब्जी बनाने वाला) अपनी इच्छा अनुसार लें और उसको रोगी के सिर पर से वार कर किसी भी धार्मिक स्थान पर, जहां पर लंगर बनता हो, दान कर दें !
  3. यदि किसी को टायफाईड हो गया हो तो उसे प्रतिदिन एक नारियल पानी पिलायें ! कुछ ही दिनों में आराम हो जायगा
  4. सफेद आँकड़े (मदार) की जड़ को लाकर स्त्री की बाईं एवं पुरुष की दाहिनी भुजा पर बाँध एक दिन छोड़कर आने वाला बुखार उतर जाएगा।
  5. यदि किसी को लगातार बुखार आ रहा हो और कोई भी दवा असर न कर रही हो तो आक की जड लेकर उसे किसी कपडे में कस कर बांध लें ! फिर उस कपडे को रोगी के कान से बांध दें ! बुखार उतर जायगा

 

हृदय विकार

हृदय विकार, रक्तचाप के लिए एकमुखी या सोलहमुखी रूद्राक्ष श्रेष्ठ होता है। इनके न मिलने पर ग्यारहमुखी, सातमुखी अथवा पांचमुखी रूद्राक्ष का उपयोग कर सकते हैं। इच्छित रूद्राक्ष को लेकर श्रावण माह में किसी प्रदोष व्रत के दिन, अथवा सोमवार के दिन, गंगाजल से स्नान करा कर शिवजी पर चढाएं, फिर सम्भव हो तो रूद्राभिषेक करें या शिवजी पर “ॐ नम: शिवाय´´ बोलते हुए दूध से अभिषेक कराएं। इस प्रकार अभिमंत्रित रूद्राक्ष को काले डोरे में डाल कर गले में पहनें।

जिन लोगों को 1-2 बार दिल का दौरा पहले भी पड़ चुका हो वे उपरोक्त प्रयोग संख्या 2 करें तथा निम्न प्रयोग भी करें :- एक पाचंमुखी रूद्राक्ष, एक लाल रंग का हकीक, 7 साबुत (डंठल सहित) लाल मिर्च को, आधा गज लाल कपड़े में रख कर व्यक्ति के ऊपर से 21 बार उसार कर इसे किसी नदी या बहते पानी में प्रवाहित कर दें।

किसी भी सोमवार से यह प्रयोग करें। बाजार से कपास के थोड़े से फूल खरीद लें। रविवार शाम 5 फूल, आधा कप पानी में साफ कर के भिगो दें। सोमवार को प्रात: उठ कर फूल को निकाल कर फेंक दें तथा बचे हुए पानी को पी जाएं। जिस पात्र में पानी पीएं, उसे उल्टा कर के रख दें। कुछ ही दिनों में आश्चर्यजनक स्वास्थ्य लाभ अनुभव करेंगे।

घर में नित्य घी का दीपक जलाना चाहिए। दीपक जलाते समय लौ पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर हो या दीपक के मध्य में (फूलदार बाती) बाती लगाना शुभ फल देने वाला है।

रात्रि के समय शयन कक्ष में कपूर जलाने से बीमारियां, दु:स्वपन नहीं आते, पितृ दोष का नाश होता है एवं घर में शांति बनी रहती है।

 

मानसिक परेशानी दूर करने के उपाय

जैसे ही टेंसन हो एक लोटे में या जग में पानी लेकर उसके अन्दर चार लालमिर्च के बीज डालकर अपने ऊपर सात बार उबारा (उसारा) करने के बाद घर के बाहर सडक पर फेंक दीजिये,फौरन आराम मिल जायेगा।

रोज हनुमान जी का पूजन करे व हनुमान चालीसा का पाठ करें ! प्रत्येक शनिवार को शनि को तेल चढायें ! अपनी पहनी हुई एक जोडी चप्पल किसी गरीब को एक बार दान करें

दर्द निवारक उपाय

आपको हाथ-पैरों में अथवा कमर के निचले हिस्से में दर्द बना रहता है तो आप काले कपड़े में पीपल के वृक्ष की जड़ व लकड़ी को रखकर अपने बिस्तर के सिरहाने रख लें और साथ में पीपल वृक्ष की सेवा करते रहें। कुछ समय बाद आप दर्द से मुक्त हो जायेंगे। ध्यान देवें :– उपाय से जल्दी फायदा हो इसके लिए ” जय श्री राम !! जय श्री हनुमान ” करें !!

!! इति: सम्पूर्ण !!!! जय सीताराम !! जय श्री हनुमान ( इष्ट देव और गुरु देव ) !! जय श्री दुर्गा माँ ( कुल देवी ) !!

 

मृत्यु की आशंका से बचने के उपाय

काले तिल और जौ का आटा तेल में गूंथकर एक मोटी रोटी बनाएं और उसे अच्छी तरह सेंकें। गुड को तेल में मिश्रित करके जिस व्यक्ति की मरने की आशंका हो, उसके सिर पर से 7 बार उतार कर मंगलवार या शनिवार को भैंस को खिला दें।

गुड के गुलगुले सवाएं लेकर 7 बार उतार कर मंगलवार या शनिवार व इतवार को चील-कौए को डाल दें, रोगी को तुरंत राहत मिलेगी।

महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। द्रोव, शहद और तिल मिश्रित कर शिवजी को अर्पित करें। ‘ॐ नमः शिवाय’ षडाक्षर मंत्र का जप भी करें, लाभ होगा।

बच्चे के उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु के लिए

एक काला रेशमी डोरा लें ! “ऊं नमोः भगवते वासुदेवाय नमः” का जाप करते हुए उस डोरे में थोडी थोडी दूरी पर सात गांठें लगायें ! उस डोरे को बच्चे के गले या कमर में बांध दें ।

प्रत्येक मंगलवार को बच्चे के सिर पर से कच्चा दूध 11 बार वार कर किसी जंगली कुत्ते को शाम के समय पिला दें ! बच्चा दीर्घायु होगा ।

बच्चे का रोना बन्द-सरसों, मिर्च (लाल) लोहबान तथा नमक लेकर बच्चे को ओइछना तथा उन वस्तुओं को आग में जलाना ।

यदि आपका बच्चा बीमार है जो भी खाता है उसकी उल्टी कर देता है। एक पान के पत्ते पर एक बूंदी का लड्डू, पांच गुलाब के फूल रखकर बच्चे के ऊपर से सात बार उसार कर चुपचाप किसी मंदिर में रखकर आ जाएं कष्टों से छुटकारा मिल जाएगा।

बुरी नजर ठीक  करने के उपाय

नमक, राई, राल, लहसुन, प्याज के सूखे छिलके व सूखी मिर्च अंगारे पर डालकर उस आग को रोगी के ऊपर सात बार घुमाने से बुरी नजर का दोष मिटता है।

शनिवार के दिन हनुमान मंदिर में जाकर प्रेमपूर्वक हनुमान जी की आराधना कर उनके कंधे पर से सिंदूर लाकर नजर लगे हुए व्यक्ति के माथे पर लगाने से बुरी नजर का प्रभाव कम होता है।

खाने के समय भी किसी व्यक्ति को नजर लग जाती है। ऐसे समय इमली की तीन छोटी डालियों को लेकर आग में जलाकर नजर लगे व्यक्ति के माथे पर से सात बार घुमाकर पानी में बुझा देते हैं और उस पानी को रोगी को पिलाने से नजर दोष दूर होता है।

कई बार हम देखते हैं, भोजन में नजर लग जाती है। तब तैयार भोजन में से थोड़ा-थोड़ा एक पत्ते पर लेकर उस पर गुलाब छिड़ककर रास्ते में रख दे। फिर बाद में सभी खाना खाएँ। नजर उतर जाएगी।

हल्दी के द्वारा पीले रंग के रंगे हुए सूती कपड़े में अजवायन रखकर, पोटली-सी बनाकर काले धागे के द्वारा बच्चे के गले में लटकाए रखने से उसे बुरी नजर नहीं लगती ।

बच्चे को नजर से बचाने के लिए उसके गाल पर काजल की बिंदी लगा दें या उसके मस्तक पर काजल से आधा चन्द्रमा बनाकर बीच में बिंदी लगा दें । बच्चे को नजर का भय नहीं रहेगा ।

झाड़ू को हाथ में लेकर मन ही मन जिसकी नजर लग सकती है, ऐसे संभाव्य व्यक्ति के नाम का उच्चारण करें और नजर लगे व्यक्ति पर से झाड़ू उतारें । झाड़ू की दो- तीन-चार काड़ियाँ तोड़कर उस पर थूवेंâ और दूर पेंâक दें ।

रविवार या शनिवार को नजर लगे व्यक्ति के सिर पर से तीन बार दूध पेâरकर एक मिट्टी की परात में रखें । यह दूध कुत्ते को दें । यदि कुत्ता दूध पी ले तो नजर उतर जायेगी ।

शनिश्चर को हनुमानजी के मन्दिर में जाकर हनुमानजी के वंâधों पर से सिन्दूर लाकर नजर लगे व्यक्ति के भाल-प्रदेश पर लगावें ।

डंडी सहित सात लाल मिर्चें, राई, नमक की डली और फिटकरी मुट्ठी में लेकर नजर लगे हुए व्यक्ति पर सात बार घुमाकर धधकती हुई आग में झौंक देने से नजर-दोष दूर हो जाता है ।

रुई की बत्ती सरसों के तेल में डुबो कर नजर-लगे व्यक्ति पर सात बार उसारकर सुलगा दें तथा बत्ती के दूसरे सिरे को दीवार पर चिपका दें अथवा चीमटे से पकड़े रहें । जिसको नजर लगी है, वह व्यक्ति उस जलती हुई बत्ती को देखे तो बत्ती में से आग झरने लगती है । इस टोटके से भी नजर-दोष दूर होता है ।

 

परेशान करने वाले व्यक्ति से शीघ्र छुटकारा पाने के लिए

यदि कोई व्यक्ति बगैर किसी कारण के परेशान कर रहा हो, तो शौच क्रिया काल में शौचालय में बैठे-बैठे वहीं के पानी से उस व्यक्ति का नाम लिखें और बाहर निकलने से पूर्व जहां पानी से नाम लिखा था, उस स्थान पर अप बाएं पैर से तीन बार ठोकर मारें। ध्यान रहे, यहप्रयोग स्वार्थवश न करें, अन्यथा हानि हो सकती है।

ऋण/ कर्ज मुक्ति के उपाय

 

व्यक्ति को ऋण मुक्त कराने में यह टोटका अवश्य सहायता करेगा : मंगलवार को शिव मन्दिर में जा कर शिवलिंग पर मसूर की दाल “ॐ ऋण मुक्तेश्वर महादेवाय नम:´´ मंत्र बोलते हुए चढ़ाएं।

सोमवार के दिन एक रूमाल, 5 गुलाब के फूल, 1 चांदी का पत्ता, थोड़े से चावल तथा थोड़ा सा गुड़ लें। फिर किसी विष्णुण्लक्ष्मी जी के मिन्दर में जा कर मूर्त्ति के सामने रूमाल रख कर शेष वस्तुओं को हाथ में लेकर 21 बार गायत्री मंत्र का पाठ करते हुए बारी-बारी इन वस्तुओं को उसमें डालते रहें। फिर इनको इकट्ठा कर के कहें की `मेरी परेशानियां दूर हो जाएं तथा मेरा कर्जा उतर जाए´। यह क्रिया आगामी 7 सोमवार और करें। कर्जा जल्दी उतर जाएगा तथा परेशानियां भी दूर हो जाएंगी।

कर्ज नाम सुनते ही दिलोदिमान पर एक बैचेनी छा जाती है. चिंताएं अपना आकार विशाल बनाने लगती है. किसी कार्य में मन नहीं लगता सिर्फ एक ही भूत याद रहता है कर्ज-कर्ज-कर्ज . तो यह उपाय करें-

रिक्ता तिथि,यम घंटक काल, भद्रा, राहु काल को त्याग कर शुभ तिथि, शुभ वार में यह प्रयोग करें.

डेढ़ मीटर सफेद कपड़ा चौकी पर बिछा लें. पूर्व में मुंह करें तथा पांच खिले हुए साबुत गुलाब के फूल, लक्ष्मी या गायत्री मंत्र पढ़ते हुए एक-एक करके सफेद कपड़े पर रखते हुए तथा फिर हल्के हाथ से कपड़े को गुलाब के फूल सहित बांध लें. इस बंधे हुए कपड़े को गंगा या यमुना नदी में प्रवाहित कर आयें.ऐसा अपनी सुविधाकार सात बार करें. माता लक्ष्मी सहयोग देगी आपकी स्थिति में सुधार होगा तथा कर्ज से मुक्ति मिलेगी.

कहते हैं लाल मसूर की दाल का दान करना भी कर्ज से मुक्ति दिलाता है।

श्मशान में मौजूद कुएं से जल भरकर पीपल के वृक्ष पर चढ़ाना चाहिए। यह नियम लगातार 7 शनिवार को करें तो फायदा होगा।

मिट्टी के दीये में सरसों का तेल भरकर इस दिये पर ढक्कन लगा दें। इसे किसी शनिवार को नदी या तालाब के किनारे मिट्टी के नीचे गाड़ देने से फायदा होता है।

पांच गुलाब के खिले हुये फूलों को गायत्री मन्त्र पढ़ते हुये डेढ़ मीटर सफ़ेद कपड़े में बाँध दीजिये और इसे नदी में प्रवाहित कर दीजिये | जल्दी ही आपको कर्ज से मुक्ति मिलेगी

ऋण मुक्ति के लिए उपाय सर्वप्रथम पांच गुलाब के फूल लाएं। ध्यान रहे कि उनकी पंखुड़ी टूटी हुई न हो। तत्पश्चात सवा मीटर सफेद कपड़ा, सामने रचो कर बिछाएं और गुलाब के वार फूलों को चारों कोनों पर बांध दें। फिर पांचवा गुलाब मध्य में डालकर गांठ लगा दें। इसे गंगा, यमुन और सरस्वती नदियों में प्रभावित करें। प्रभुकृपा से ऋण मुक्ति और घर में सुख समृध्दि की प्राप्ति होती है।

किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथमा के दिन नित्यक्रम से निवृत्त होकर स्नानोपंरात स्वच्छ वस्त्र धारण करें और अपने पूजा स्थान में यह पूजा प्रारंभ करें। 6 इंच लम्बी गूलर की पेड़ की जड़ ले उसके ऊपर 108 बार काले रंग का धागा ॐ गं गणपतये नम:मंत्र का जाप करते हुये लपेटे। भगवान गणेश जी से ऋण मुक्ति की प्रार्थना करें। 108 चक्र होने के बाद इस लकड़ी को स्वच्छ थाली में पीला वस्त्र बिछाकर रख दें। तत्पश्चात श्रद्धानुसार धूप,दीप, नैवद्य, पुष्प अर्पित करें। घी का दीपक प्रज्जवलित कर उसमें एक इलायची डाल दें। शुद्ध आसन बिछाकर अपने सामने हल्दी से रंगे हुये अक्षत रख लें। अपने हाथ में थोड़े से अक्षत लें ॐ गं गणपतये ऋण हरताये नम:मंत्र का जाप करके अक्षत गूलर की लकड़ी के ऊपर छोड़ दे। ऐसा 108 बार करें। अगले दिन यह प्रक्रिया पुन:दोहरायें। ऐसा नवमी तक पूजन करें। नवमी के दिन रात में सवा ग्यारह बजे पुन:एक बार पूजन करें। ऋण हरता गणपति की 11 माला जाप करें। तत्पश्चात इस लकड़ी को अपने ऊपर से 11 बार उसार कर के अपने घर के किसी कोने में गड्डा खेंद कर दबा दे। उसके ऊपर कोई भारी वस्तु रख दें। ऐसा करने से कर्ज से छुटकारा मिल जायेगा।

खैर(कत्था) की लकड़ी के कोयले से तीन खड़ी रेखाएं भूमि पर खींचें, फिर नीचे लिखे हुए दोनों मंत्रों को पढ़ते हुए बाएं पैर की ऐड़ी से रगड़ कर मिटा दें। मंत्र इस प्रकार हैं-

दु:खदौर्भाग्यनाशाय पुत्रसन्तानहेतवे।

कृतरेखात्रयं वामपादेनैतत्प्रामाज्म्र्यहम्।।1।।

ऋणदु:खविनाशाय मनोभीप्सार्थसिद्धये।

मार्जयाम्यसितारेखास्तिस्रो जन्मत्रयोद्भवा:।।2।।

इस टोटके से आप शीघ्र ही कर्ज मुक्त हो जाएंगे।

ॐ श्री ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नमः। इस मंत्र की कमलगट्टे की माला से प्रतिदिन जप करने से ऋणमुक्ति होती है।

पूर्णिमा व मंगलवार के दिन उधार दें और बुधवार को कर्ज लें।

कभी भूलकर भी मंगलवार को कर्ज न लें एवं लिए हुए कर्ज की प्रथम किश्त मंगलवार से देना शुरू करें। इससे कर्ज शीघ्र उतर जाता है।

कर्ज मुक्ति के लिए ऋणमोचन मंगल स्तोत्र का पाठ करें |

अपने घर के ईशान कोण को सदैव स्वच्छ व साफ रखें।

ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र का शुक्लपक्ष के बुधवार से नित्य पाठ करें।

1 - “ॐ ऋण-मुक्तेश्वर महादेवाय नमः”

2 - “ॐ मंगलमूर्तये नमः।”

3 - “ॐ गं ऋणहर्तायै नमः।”

इनमे से किसी भी मन्त्र के नित्य कम से कम एक माला के जप से व्यक्ति को अति शीघ्र कर्जे से मुक्ति मिलती है ।

धन प्राप्ति के उपाय

 

मनचाहा धन चाहिए तो आज लें लक्ष्मी के 18 पुत्रों का नाम

भगवती लक्ष्मी के 18 पुत्र माने जाते हैं। शुक्रवार के दिन इनके नाम के आरंभ में ॐ और अंत में 'नम:' लगाकर जप करने से मनचाहे धन की प्राप्ति होती है। जैसे -

1. ॐ देवसखाय नम:,

2. ॐ चिक्लीताय नम:,

3. ॐ आनंदाय नम:,

4. ॐ कर्दमाय नम:,

5. ॐ श्रीप्रदाय नम:,

6. ॐ जातवेदाय नम:,

7. ॐ अनुरागाय नम:,

8. ॐ संवादाय नम:,

9. ॐ विजयाय नम:,

10. ॐ वल्लभाय नम:,

11. ॐ मदाय नम:,

12. ॐ हर्षाय नम:,

13. ॐ बलाय नम:,

14. ॐ तेजसे नम:,

15. ॐ दमकाय नम:,

16. ॐ सलिलाय नम:,

17. ॐ गुग्गुलाय नम:,

18. ॐ कुरूंटकाय नम:

तिजोरी में गुंजा के बीज रखने से भी धन की वृद्धि होती है।

सबसे छोटे चलने वाले नोट का एक त्रिकोण पिरामिड बनाकर घर के धन स्थान में रख दीजिये,जब धन की कमी होने लगे तो उस पिरामिड को बायें हाथ में रखकर दाहिने हाथ से उसे ढककर कल्पना कीजिये कि यह पिरामिड घर में धन ला रहा है,कहीं से भी धन का बन्दोबस्त हो जायेगा,लेकिन यह प्रयोग बहुत ही जरूरत में कीजिये।

यदि आप चाहते है की आप के धन में दुगना तिगुना वृद्धि हो तो आप आजमा कर देखे, आप को करना यह है की आप रात को सोने से पहले व्यापारियों की तरह अपने पास के नोटों की गिनती कर के सोये तथा विनती करे की धन तुम सिर्फ मेरे पास आओ धन तुम किसी भी रस्ते से आओ ! जो रास्ता तुम्हे सही लगे तुम उस रस्ते से आओ हे धन तुम तीन गुणा बढ़ कर आओ बिना किसी को नुक्सान पहुचाये मेरे पास आओ हम तुम्हे स्वीकार करने को तैयार है शास्त्रानुसार प्रत्येक पूर्णिमा पर प्रात: १० बजे पीपल वृक्ष पर माँ लक्ष्मी का फेरा लगता है। इसलिए जो व्यक्ति आर्थिक रूप से परेशान हो, वो इस समय पीपल के वृक्ष के पास जाये, उसका पूजन करें, जल चढ़ाये और लक्ष्मी जी की उपासना करे और कम-से-कम कोई भी एक लक्ष्मी मंत्र की एक माला करके आये।

लक्ष्मी का प्रतीक कौड़ियां : पीली कौड़ी को देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। कुछ सफेद कौड़ियों को केसर या हल्दी के घोल में भिगोकर उसे लाल कपड़े में बांधकर घर में स्थित तिजोरी में रखें। कौड़ियों के अलावा एक नारियल की विधि-विधान से पूजा कर उसे चमकीले लाल कपड़े में लपेटकर तिजोरी में रख दें।

शंख का महत्व : शंख समुद्र मंथन के समय प्राप्त चौदह अनमोल रत्नों में से एक है। लक्ष्मी के साथ उत्पन्न होने के कारण इसे लक्ष्मी भ्राता भी कहा जाता है। यही कारण है कि जिस घर में शंख होता है वहां लक्ष्मी का वास होता है। घर में शंख जरूर रखें।

पीले वस्त्र पर सात अभिमंत्रित गोमती चक्र, तीन लघु नारियल एवं एक मोती शंख में चांदी का सिक्का डालकर रखें फिर नीचे लिखे मंत्र की एक माला जप करते हुए थोड़े-थोड़े चावल शंख में डालते जाएं।

मंत्र- ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं

मंत्र जप के बाद शंख में भरे चावल व अन्य सामग्री को उसी पीले कपड़े में बांधकर द्वार पर लटका दें। इससे धन आगमन के रास्त खुलेंगे और घर के सदस्यों की आय में वृद्धि होने लगेगी।

लाल धागे में सातमुखी रुद्राक्ष गले में धारण करने से धन की प्राप्ति होती है।

सवा पांच किलो आटा एवं सवा किलो गुड़ लें। दोनों का मिश्रण कर रोटियां बना लें। गुरुवार के दिन सायंकाल गाय को खिलाएं। तीन गुरुवार तक यह कार्य करने से दरिद्रता समाप्त होती है।

प्रति शनिवार को पीपल को जल चढ़ाकर उसकी पूजा करेंगे तो धन और समृद्धि में बढ़ोत्तरी होगी।

ग्यारह गोमती चक्र और तीन लघु नारियलों की यथाविधि पूजा कर उन्हें पीले वस्त्र में बांधकर बुधवार या शुक्रवार को अपने दरवाजे पर लटकाएं तथा हर पूर्णिमा को धूप दीप जलाएं। यह क्रिया निष्ठापूर्वक नियमित रूप से करें, ग्राहकों की संख्या में वृद्धि होगी और बिक्री बढ़ेगी

घर में समृद्धि लाने हेतु घर के उत्तरपश्चिम के कोण (वायव्य कोण) में सुन्दर से मिट्टी के बर्तन में कुछ सोने-चांदी के सिक्के, लाल कपड़े में बांध कर रखें। फिर बर्तन को गेहूं या चावल से भर दें। ऐसा करने से घर में धन का अभाव नहीं रहेगा।

ईशान कोण घर का ईशान कोण हमेशा खाली रखें। हो सके तो वहां पर जलभरा एक पात्र रखें। चाहे तो वहां जल कलश भी रख सकते हैं।

बांस निर्मित बांसुरी भगवान श्रीकृष्ण को अतिप्रिय है। जिस घर में बांसुरी रखी होती है, वहां के लोगों में परस्पर प्रेम तो बना रहता है और साथ ही सुख-समृद्धि भी बनी रहती है।

- पुष्य नक्षत्र के शुभ मुहूर्त में शंखपुष्पी की जड़ को विधिवत लेकर आएं और उसे धूप देकर भगवान शिव का ध्यान करते हुए चांदी की डिब्बी में रखें। इसे अपनी तिजोरी में रखने से आर्थिक समस्या दूर हो जाएगी।

शास्त्रानुसार प्रत्येक पूर्णिमा पर प्रात: १० बजे पीपल वृक्ष पर माँ लक्ष्मी का फेरा लगता है। इसलिए जो व्यक्ति आर्थिक रूप से परेशान हो, वो इस समय पीपल के वृक्ष के पास जाये, उसका पूजन करें, जल चढ़ाये और लक्ष्मी जी की उपासना करे और कम-से-कम कोई भी एक लक्ष्मी मंत्र की एक माला करके आये।

किसी भी शुभ मुहूर्त या अक्षय तृतीया या पूर्णिमा या दीपावली या किसी अन्य मुहूर्त में सुबह जल्दी उठें। सभी आवश्यक कार्यों से निवृत्त होकर लाल रेशमी कपड़ा लें। अब उस लाल कपड़े में चावल के 21 दानें रखें। ध्यान रहें चावल के सभी 21 दानें पूरी तरह से अखंडित होना चाहिए यानि कोई टूटा हुआ दान न रखें। उन दानों को कपड़े में बांध लें। इसके बाद धन की देवी माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजन करें। पूजा में यह लाल कपड़े में बंधे चावल भी रखें। पूजन के बाद यह लाल कपड़े में बंधे चावल अपने पर्स में छुपाकर रख लें। ऐसा करने पर कुछ ही समय में धन संबंधी परेशानियां दूर होने लगेंगी। ध्यान रखें कि पर्स में किसी भी प्रकार की अधार्मिक वस्तु कतई न रखें। इसके अलावा पर्स में चाबियां नहीं रखनी चाहिए। सिक्के और नोट अलग-अलग व्यस्थित ढंग से रखे होने चाहिए। किसी भी प्रकार की अनावश्यक वस्तु पर्स में न रखें। इन बातों के साथ ही व्यक्ति को स्वयं के स्तर भी धन प्राप्ति के लिए पूरे प्रयास करने चाहिए।

यदि आपके घर में पहली संतान पुत्र रत्न के रूप में आई हो तो उसका दांत जब भी गिरे उसे जमीन पर गिरने से पहले हाथ से उठाकर पवित्र स्थान पर रख दें और गुरू पुष्य नक्षत्र में दांत को गंगा जल से शुद्ध करें। उसे धूप-दीप दिखाकर चांदी की डिबिया में रख लें। इस डिबिया को सदैव अपने पास रखें या अपने धन स्थान में रखें। जब बच्चे का जन्म नक्षत्र आए तो पुनः दांत शुद्ध करें और उसे धूप-दीप दिखाएं। ऐसा प्रत्येक माह करें। आपके पास धन की कोई कमी नहीं होगी।

कुत्तों को भोजन का कुछ अंश अवश्य दान करना चाहिए क्योंकि कुत्ते भैरव गण का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन्हें दिया गया भोजन जातक के रोग व दरिद्रता में कमी करता है।

सुबह कुल्ला किए बिना पानी या चाय न पीएं। जूठे हाथों से या पैरों से कभी गौ, ब्राह्मण तथा अग्नि का स्पर्श न करें।

घर में देवी-देवताओं पर चढ़ाए गए फूल या हार के सूख जाने पर भी उन्हें घर में रखना अलाभकारी होता है।

अपने घर में पवित्र नदियों का जल संग्रह कर के रखना चाहिए। इसे घर के ईशान कोण में रखने से अधिक लाभ होता है।

हर अमावस को लाभ के लिए लक्ष्मी पूजन करें तो लक्ष्मी अति प्रसन्न होती हैं और धन लाभ होता है।

काले तिल परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर सात बार उतार (उसार) कर घर के उत्तर दिशा में फेंक दें, धनहानि बंद होगी।

शाम के समय सोना, पढ़ना और भोजन करना निषिद्ध है। सोने से पूर्व पैरों को ठंडे पानी से धोना चाहिए, किन्तु गीले पैर नहीं सोना चाहिए। इससे धन का नाश होता है।

घर की प्रमुख महिला जो सुबह सूर्योदय से पहले उठ जाती है, वह यदि प्रतिदिन तांबे के लोटे में जल भरकर मुख्य द्वार पर छिड़के तो लक्ष्मीजी प्रसन्न होती हैं।

इमली की टहनी को काटकर धर गल्ले या जेब मे रखा जाये तो धन की वृद्वि होती है तथा धर में बरकत रहती है।

दुकान या घर से निकलते समय खाली जेब न चलें। कुछ रुपए साथ लेकर चलें।

भोजन सदैव पूर्व या उत्तर की ओर मुख कर के करना चाहिए। संभव हो तो रसोईघर में ही बैठकर भोजन करें इससे राहु शांत होता है। जूते पहने हुए कभी भोजन नहीं करना चाहिए।

रात में चावल, दही और सत्तू का सेवन करने से लक्ष्मी का निरादर होता है।

काले तिल परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर सात बार उतार (उसार) कर घर के उत्तर दिशा में फेंक दें, धनहानि बंद होगी।

जन्म पत्रिका के बारहवें भाव के स्वामी ग्रह का दान अवश्य करना चाहिए, ऐसा करने से खर्च व्यय में कमी आती है एवं घर में सुख स्मृद्घि अपने पैर पसारने लगती है।

घर के अंदर, लक्ष्मी जी बैठी हों ऐसा फोटो रखना चाहिए और दुकान के अंदर, लक्ष्मी जी खड़ी हों ऐसा फोटो रखना चाहिए।

ईशान कोण में तुलसी का पौधा लगाने से तथा पूजा के स्थान पर गंगाजल रखने से घर में लक्ष्मी की वृद्धि होती है।

नौकरी-धंधे के लिए जाते हों और सफलता नहीं मिल पाती हो तो इक्कीस बार 'श्रीमद् भगवद् गीता' का अंतिम श्लोक बोलकर फिर घर से निकलें तो सफलता मिलेगी। श्लोकः

यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः।

तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम।।

 

श्रीहरि.... श्रीहरि... श्रीहरि – ऐसा थोड़ी देर जप करें। तीन बार जपने से एक मंत्र हुआ। उत्तराभिमुख होकर इस मंत्र की 1-2 माला शांतिपूर्वक करें और चलते-फिरते भी इसका जप करें तो विशेष लाभ होगा और रोजी रोटी के साथ ही शांति, भक्ति और आनंद भी बढ़ेगा। बस, अपने-आप समस्या हल हो जायेगी।

लक्ष्मी चाहने वाला मनुष्य भोजन और दूध को बिना ढके न रखे।

कपूर और रोली जलाकर उसकी राख को पुडिया बनाकर अपने घर या दुकान के धन स्थान में रखें तो निश्चित ही लाभ बना रहेगा ।

 

अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिये शुक्ल पक्ष के शुक्रवार को हरे हकीम की 54 नागों की एक माला लक्ष्मी जी को चढ़ाएं

यदि आप हमेशा आर्थिक समस्या से परेशान हैं तो इसके लिए आप 21 शुक्रवार 9 वर्ष से कम आयु की 5 कन्यायों को खीर व मिश्री का प्रसाद बांटें.

-सूर्यास्त के समय आधा किलो गाय के कच्चे दूध में 9 बूँदें शहद की डाल दें। स्नान करने के पश्चात अपने मकान की छ्त से आरम्भ कर मकान के प्रत्येक कमरे व भाग में इस दूध के छीटें लगाएं। ध्यान रहे कि घर का कुछ भी हिस्सा न बचे। अब इस में बचे हुए दूध को अपने मुख्यद्वार के सामने धार देते हुए गिरा दें। ऐसा 21 दिन तक लगातार करें। छीटें डालते समय जिस देवी देवता को आप मानते हों उससे मन ही मन अपने आर्थिक कष्टों, प्रमोशन आदि की कामना करते रहें।

सोमवार के टोटके

यदि आप पैसों की तंगी से परेशान है। धन कमाने के आपके सभी प्रयास विफल हो जातेे है तो रविवार या सोमवार के दिन बाजार से तीन झाड़ू खरीदकर लाएं। अगले दिन ब्रह्म मुहूर्त में सभी नित्य क्रियाओं से निवृत्त होकर पवित्र हो जाएं। इसके बाद अपने घर के आसपास किसी मंदिर में वह तीनों झाड़ू रख आएं। ध्यान रहे झाड़ू ले जाते समय और मंदिर रखते समय आपको कोई देखे नहीं। यदि किसी ने आपको देख लिया तो इस उपाय का प्रभाव समाप्त होने संभावना रहती है। यदि यह उपाय ठीक से कर लिया जाएगा तो शीघ्र ही पैसा से जुड़ी तमाम समस्याएं दूर हो जाएंगी। ध्यान रखें इसके साथ आपको अपने प्रयास भी करने पड़ेंगे।

षुक्ल पक्ष के सोमवार के दिन एक मुठठी साबुन बासमती चावल बहते हुए ज लमे श्री महालक्ष्मी का स्मरण करते हुए बहा देना चाहिए।

किसी भी सोमवार से यह प्रयोग करें। बाजार से कपास के थोड़े से फूल खरीद लें। रविवार शाम 5 फूल, आधा कप पानी में साफ कर के भिगो दें। सोमवार को प्रात: उठ कर फूल को निकाल कर फेंक दें तथा बचे हुए पानी को पी जाएं। जिस पात्र में पानी पीएं, उसे उल्टा कर के रख दें। कुछ ही दिनों में आश्चर्यजनक स्वास्थ्य लाभ अनुभव करेंगे।

मंगलवार के टोटके

मंगलवार को हनुमान मंदिर में नारियल रखना अच्छा माना जाता है।

मंगलवार के दिन लाल वस्त्र, लाल फल, लाल फूल और लाल रंग की मिठाई श्री गणेश को चढ़ाने से मनचाही कामना पूरी होती है।

मंगलवार के दिन किसी देवी मंदिर में ध्वजा चढ़ा कर आर्थिक समृद्धि की प्रार्थना करनी चाहिए। पांच मंगलवार तक ऐसा करने से धन के मार्ग की सारी रूकावटें दूर हो जाएगी।

* मन की शांति के लिए पांच लाल फूल किसी मिट्टी के पात्र में गेहूं के साथ रखकर घर की छत के पूर्वी कोने में मंगलवार को ढंक कर रखें और अगले मंगलवार तक उसे छुए नहीं। अगले मंगलवार को सारे गेहूं छत पर फैला दें और फूलों को घर के मंदिर में रख लें। आपके जीवन के सारे तनाव दूर होंगे और शांति आप खुद महसूस करेंगे।

- यदि अचानक ज्यादा खर्च की स्थिति बने तो मंगलवार के दिन हनुमानजी के मंदिर में गुड़-चने का भोग लगाएं और 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। यह प्रयोग तीन मंगलवार तक करें।

- पीपल के पत्ते पर राम लिखकर तथा कुछ मीठा रखकर हनुमान मंदिर में चढ़ाएं। इससे धन लाभ होने लगेगा।

यदि आपके व्यय भाव में मंगल है तो बंदर को चना खिलाएं या सांड को गुड़ चना। यदि व्यय भाव में गुरू है तो विद्वान ब्राह्मण को शिक्षण सामग्री उपलब्ध करवाएं। यथा संभव पीली वस्तुओं एवं पुस्तकों का दान करें।

लाल कपड़े में सौंफ बाँधकर अपने शयनकक्ष में रखनी चाहिए।

ऐसा व्यक्ति जब भी अपना घर बनवाये तो उसे घर में लाल पत्थर अवश्य लगवाना चाहिए।

बन्धुजनों को मिष्ठान्न का सेवन कराने से भी मंगल शुभ बनता है।

लाल वस्त्र ले कर उसमें दो मुठ्ठी मसूर की दाल बाँधकर मंगलवार के दिन किसी भिखारी को दान करनी चाहिए।

मंगलवार के दिन हनुमानजी के चरण से सिन्दूर ले कर उसका टीका माथे पर लगाना चाहिए।

बंदरों को गुड़ और चने खिलाने चाहिए।

अपने घर में लाल पुष्प वाले पौधे या वृक्ष लगाकर उनकी देखभाल करनी चाहिए।

मंगल के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु मंगलवार का दिन, मंगल के नक्षत्र (मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा) तथा मंगल की होरा में अधिक शुभ होते हैं।

 

बुधवार के टोटके

उपाय के अनुसार बुधवार के दिन सात साबूत कौडिय़ां लें। कौडिय़ां बाजार में पूजन सामग्री की दुकानों पर आसानी से मिल जाती है। इसके साथ ही एक मुट्ठी हरे खड़े मूंग लें। दोनों को एक हरे कपड़े में बांध लें और किसी मंदिर की सीढिय़ों पर चुपचाप रख आएं। यहां बताए गए सभी उपाय तंत्र शास्त्र के अनुसार दिए गए हैं। ऐसे उपाय चुपचाप बिना किसी को बताए किए जाए तो अधिक प्रभावी सिद्ध होते हैं। अत: इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इसके साथ ही इन उपायों के संबंध में किसी भी प्रकार की शंका या संदेह न करें। यह पूरी तरह आस्था और विश्वास के उपाय हैं।

बुधवार लक्ष्मी के आगमन का दिन है। इस दिन धन का भुगतान अथवा माल या नगद राशि उधार नहीं देना चाहिए। इससे धन आगमन में रुकावट होती है।

बुधवार के दिन हरे रंग की चूड़ियाँ हिजड़े को दान करनी चाहिए।

हरी सब्जियाँ एवं हरा चारा गाय को खिलाना चाहिए।

बुधवार के दिन गणेशजी के मंदिर में मूँग के लड्डुओं का भोग लगाएँ तथा बच्चों को बाँटें।

घर में खंडित एवं फटी हुई धार्मिक पुस्तकें एवं ग्रंथ नहीं रखने चाहिए।

अपने घर में कंटीले पौधे, झाड़ियाँ एवं वृक्ष नहीं लगाने चाहिए। फलदार पौधे लगाने से बुध ग्रह की अनुकूलता बढ़ती है।

तोता पालने से भी बुध ग्रह की अनुकूलता बढ़ती है।

बुध के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु बुधवार का दिन, बुध के नक्षत्र (आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती) तथा बुध की होरा में अधिक शुभ होते हैं।

गुरुवार के टोटके

किसी भी मन्दिर में सिद्ध मूहर्त में केले के दो पौधे (नर एवं मादा) लगाएं तथा इन्हें नियमित सीचें। जब यह फल देने लग जाए तो समझो आपके आर्थिक कष्ट दूर होने वाले हैं।

गुरुवार के दिन यदि आपको आपको अचानक अधिक धन की प्राप्ति हो जाए तो उसमें से 15, 30, 45 या 60 के अनुपात में धन राशि का लिफाफा बनाकर मंदिर में रख दें।

गुरु ग्रह को सौभाग्य, सम्मान और समृद्धि नियत करने वाला माना गया है।शास्त्रों में यश व सफलता के इच्छुक हर इंसान के लिये गुरु ग्रह दोष शांति का एक बहुत ही सरल उपाय बताया गया है।यह उपाय औषधीय स्नान के रूप में प्रसिद्ध है इसे हर इंसान दिन की शुरुआत में नहाते वक्त कर सकता है। नहाते वक्त नीचे लिखी चीजों में से थोड़ी मात्रा में कोई भी एक चीज जल में डालकर नहाने से गुरु दोष शांति होती है और व्यक्ति को समाज में मान सम्मान की प्राप्ति होती है ।

गुड़, सोने की कोई वस्तु ,हल्दी, शहद, शक्कर, नमक, मुलेठी, पीले फूल, सरसों।

षुक्ल पक्ष के गुरूवार को पीले रंग का मीठे चावल बनाकर गरीबो मे बांटने से धन लाभ होगा।

11 गुरुवार  पानी और हल्दी मिलाकर  केले के पेड़ पर गुड़  चढ़ायें और धन लाभ की प्रार्थना करें ।

हल्दी, शहद, शक्कर, नमक, मुलेठी, पीले फूल, सरसों में कोई भी एक चीज जल में डालकर केले के पेड़ पर चढ़ायें ।

ऐसे व्यक्ति को अपने माता-पिता, गुरुजन एवं अन्य पूजनीय व्यक्तियों के प्रति आदर भाव रखना चाहिए तथा महत्त्वपूर्ण समयों पर इनका चरण स्पर्श कर आशिर्वाद लेना चाहिए।

सफेद चन्दन की लकड़ी को पत्थर पर घिसकर उसमें केसर मिलाकर लेप को माथे पर लगाना चाहिए या टीका लगाना चाहिए।

व्यक्ति को मन्दिर में या किसी धर्म स्थल पर निःशुल्क सेवा करनी चाहिए।

किसी भी मन्दिर या इबादत घर के सम्मुख से निकलने पर अपना सिर श्रद्धा से झुकाना चाहिए।

ऐसे व्यक्ति को परस्त्री / परपुरुष से संबंध नहीं रखने चाहिए।

गुरुवार के दिन मन्दिर में केले के पेड़ के सम्मुख गौघृत का दीपक जलाना चाहिए।

गुरुवार के दिन आटे के लोयी में चने की दाल, गुड़ एवं पीसी हल्दी डालकर गाय को खिलानी चाहिए।

जिन उद्योगपतियों या व्यापारियों को काफी प्रयास और अथक परिश्रम करने के बावजूद बिक्री में वृध्दि नहीं हो पा रहा हो तो यह उपाय शुक्ल पक्ष में गुरुवार से प्रारम्भ करें और प्रत्येक गुरुवार को इस क्रिया को दोहराते रहें। घर के मुख्य द्वार के एक कोने को गंगाजल से शुध्द कर लें या धो लें। शुध्द किए गए स्थान पर स्वस्तिक का चिह्न बनाएं और उस पर थोड़ा दाल और गुड़ रख दें। साथ ही एक घी का दीपक जला दें। ध्यान रहे कि स्वस्तिक का चिह्न हल्दी से ही बनाएं। स्वास्तिक बनाने के बाद उसको बार-बार नहीं देखना चाहिए। यह उपाय बहुत ही सरल है और इसका प्रभाव शीघ्र ही परिलक्षित होने लगता है।

किसी भी गुरु पुष्य नक्षत्र के दिन प्रात:काल नित्यकर्म से निवृत होकर स्नानोपरांत शंख पुष्पी की जड़ अपने घर में लेकर आएं इस जड़ को गंगाजल से पवित्र कर दें। पवित्र करने के उपरांत चांदी की डिब्बी में पीले चावल भरकर उसके ऊपर रख दें। श्रद्धानुसार धूप, दीप, नेवैद्य, पुष्प, अक्षत अर्पित कर पंचोपचार पूजन करें। उसके बाद इस डिब्बी को अपनी तिजोरी में रख दें। धन में वृद्धि और कारोबारमें लाभ होगा। हर गुरु पुष्य के दिन शंख पुष्पी की जड़ व चांदी की डिब्बी बदल दें। पहले वाली बहते पानी में प्रवाह कर दें।

कठिन परिश्रम व मेहनत करने के उपरांत लाभ की प्राप्ति नहीं हो रही हो तो प्रत्येक गुरुवार के दिन शुभ घड़ी में पीले कपड़े में 9 जोड़े चने की दाल, 9 पीले गोपी चंदन की डलियां, 9 गोमती चक्र इन सबको पोटली बनाकर किसी भी मंदिर में केले के पेड़ के ऊपर शाम के समय टांग दें। साथ ही एक घी का दीपक भी प्रज्ज्वलित कर लें। ऐसा 11 गुरुवार करने से धन की प्राप्ति होगी और व्यवसायिक समस्याओं का निवारण भी होगा

गुरु के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु गुरुवार का दिन, गुरु के नक्षत्र (पुनर्वसु, विशाखा,Poorv Bharrapad and Guru hora mein SUBH hota hai

अपने घर में तुलसी का पौधा अवश्य लगाना चाहिए तथा निरन्तर उसकी देखभाल करनी चाहिए। बुधवार के दिन तुलसी पत्र का सेवन करना चाहिए।

यदि आपका व्यवसाय तकनीकी क्षेत्र का है और आपके व्यवसाय में हमेशा कोई न कोई मशीन बहुत जल्दी खराब होती हो तो यह उपाय बहुत ही लाभदायक रहेगा। किसी भी माह के प्रथम गुरुवार के दिन हल्दी, कुंकुम और केसर की स्याही बनाकर नौ इंच सफेद कच्चे धागे को रंग लें। तत्पश्चात उसमें नौ गांठ लगा दें। मशीन के ऊपर उसी स्याही से स्वास्तिक बनाकर उस धागे को बांध दें। मशीन खराब नहीं होगी और कर्मचारी में मन लगाकर काम करेंगे

 

शुक्रवार के टोटके

शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार को लक्ष्मी-नारायण मंदिर में जाकर शाम के समय नौ वर्ष से कम उम्र की कन्याओं को खीर के साथ मिश्री का भोजन कराएं तथा उपहार में कोई लाल वस्तु दें। यह उपाय लगातार तीन शुक्रवार करें।

शुक्रवार के दिन से प्रतिदिन शाम के समय तुलसी के पौधे के सामने गाय के घी का दीपक जलाएं।

प्रत्येक शुक्रवार को लक्ष्मी नारायण मंदिर में गुड चना बाँटने और माँ लक्ष्मी की मूर्ति पर सुंगधित धूप अगरबत्ती को जलाने और उन्हें चडाने से व्यक्ति को जीवन भर अपने कार्य क्षेत्र में लाभ की प्राप्ति होती रहती है ।

शुक्र का स्नान उपाय करते समय जल में बडी इलायची डालकर उबाल कर इस जल को स्नान के पानी में मिलाया जाता है. इसके बाद इस पानी से स्नान किया जाता है. स्नान करने से वस्तु का प्रभाव व्यक्ति पर प्रत्यक्ष रुप से पडता है. तथा शुक्र के दोषों का निवारण होता है. यह उपाय करते समय व्यक्ति को अपनी शुद्धता का ध्यान रखना चाहिए. तथा उपाय करने कि अवधि के दौरान शुक्र देव का ध्यान करने से उपाय की शुभता में वृ्द्धि होती है. इसके दौरान शुक्र मंत्र का जाप करने से भी शुक्र के उपाय के फलों को सहयोग प्राप्त होता है

शुक्र की दान देने वाली वस्तुओं में घी व चावन का दान किया जाता है. इसके अतिरिक्त शुक्र क्योकि भोग-विलास के कारक ग्रह है. इसलिये सुख- आराम की वस्तुओं का भी दान किया जा सकता है. बनाव -श्रंगार की वस्तुओं का दान भी इसके अन्तर्गत किया जा सकता है. दान क्रिया में दान करने वाले व्यक्ति में श्रद्धा व विश्वास होना आवश्यक है. तथा यह दान व्यक्ति को अपने हाथों से करना चाहिए. दान से पहले अपने बडों का आशिर्वाद लेना उपाय की शुभता को बढाने में सहयोग करता है । 

यदि आप आर्थिक रूप से बहुत ही समस्याग्रस्त हैं तो 21 शुक्रवार ”वैभव लक्ष्मी” का पूजन करें। साथ ही, उपवास करें और एक वर्ष से कम आयु की

कन्याओं को खीर एवं मिश्री प्रत्येक शुक्रवार को खिलाएं। कुछ समय बाद ही आपकी परेशानी कम होने लगेगी।

पांच गोमती चक्र ले कर लाल वस्त्र में बाँध कर अपनी दुकान की चौखट पर बाँध दें। यह कार्य शुक्रवार के दिन शुभ मूहर्त में करें।

शुक्र्वार की रात को सवा किलो काले चने भिगो दें ! दूसरे दिन शनिवार को उन्हें सरसों के तेल में बना लें ! उसके तीन हिस्से कर लें ! उसमें से एक हिस्सा घोडे या भैंसे को खिला दें ! दूसरा हिस्सा कुष्ठ रोगी को दे दें और तीसरा हिस्सा अपने सिर से घडी की सूई से उल्टे तरफ तीन बार वार कर किसी चौराहे पर रख दें ! यह प्रयोग 40 दिन तक करें ! कारोबार में लाभ होगा !

काली चींटियों को चीनी खिलानी चाहिए।

शुक्रवार के दिन सफेद गाय को आटा खिलाना चाहिए।

गौ-दुग्ध से स्नान करना चाहिए।

शुक्रवार के दिन किसी काने व्यक्ति को सफेद वस्त्र एवं सफेद मिष्ठान्न का दान करना चाहिए।

किसी महत्त्वपूर्ण कार्य के लिए जाते समय १० वर्ष से कम आयु की कन्या का चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लेना चाहिए।

अपने घर में सफेद पत्थर लगवाना चाहिए।

किसी कन्या के विवाह में कन्यादान का अवसर मिले तो अवश्य स्वीकारना चाहिए।

शुक्र के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु शुक्रवार का दिन, शुक्र के नक्षत्र (भरणी, पूर्वा-फाल्गुनी, पुर्वाषाढ़ा) तथा शुक्र की होरा में अधिक शुभ होते हैं।

शनिवार के टोटके

आर्थिक वृद्धि के लिए सदैव शनिवार के दिन गेहूं पीसवाएं तथा गेहूं में एक मुट्ठी काला चना अवश्य डालें।

पीपल के वृक्ष में यथा संभव जल चढ़ाना चाहिए एवं परिक्रमा करनी चाहिए। यदि गंदे पानी का निकास स्थान (नाली/पाइप) पीपल के वृक्ष के समीप हो तो उसे बंद कर देना चाहिए।

शनिवार के दिन किसी पीपल के पेड़ के पास जाकर एक पत्ता तोड़कर घर लाएं। अब इस पीपल के पत्ते को गंगाजल से धोकर उसके ऊपर हल्दी के घोल से दाएं हाथ की अनामिका अंगुली से ''हृीं'' लिखें।'हृीं'' लिखने के पश्चात पीपल के इस पत्ते को धूप-दीप दिखाएं और पूजन कर अपने पर्स में रख लें। इस पत्ते को सप्ताह भर अपनी जेब में रखें और अगले शनिवार दूसरा पत्ता तोड़कर लाएं और यही क्रम दोहराएं। हर शनिवार इस क्रम को दोहराएं और नया पत्ता अपने पर्स में रख लें।

पुराने पत्ते को जेब से निकालकर किसी पवित्र स्थान पर रख दें या फिर बहते पानी में प्रवाहित कर दें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पुराने पत्ते को किसी अशुद्ध स्थान पर बिल्कुल न रखें, ना ही कचरे में फेंके।

पीपल के पेड़ में शनिवार और मंगलवार को दूध, पानी और गुड़ मिलाकर चढ़ायें और प्रार्थना करें कि 'भगवान ! आपने गीता में कहा है 'वृक्षों मे पीपल मैं हूँ।' तो हमने आपके चरणों में अर्घ्य अर्पण किया है, इसे स्वीकार करें और मेरी नौकरी धंधे की जो समस्या है वह दूर हो जाय। 

आप अपने वज़न के बराबर कच्चा कोयला लेकर जल प्रवाह कर दें ! अवश्य लाभ होगा.

शनिवार के दिन पीपल वृक्ष की जड़ पर तिल्ली के तेल का दीपक जलाएँ।

शनिवार के दिन लोहे, चमड़े, लकड़ी की वस्तुएँ एवं किसी भी प्रकार का तेल नहीं खरीदना चाहिए।

शनिवार के दिन बाल एवं दाढ़ी-मूँछ नही कटवाने चाहिए।

भड्डरी को कड़वे तेल का दान करना चाहिए।

भिखारी को उड़द की दाल की कचोरी खिलानी चाहिए।

किसी दुःखी व्यक्ति के आँसू अपने हाथों से पोंछने चाहिए।

घर में काला पत्थर लगवाना चाहिए।

शनि के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु शनिवार का दिन, शनि के नक्षत्र (पुष्य, अनुराधा, उत्तरा-भाद्रपद) तथा शनि की होरा में अधिक शुभ होते हैं।

यदि आपके परिवार में हमेशा कलह रहता हो पारिवारिक सदस्य सुख शांति से न रहते हो तो शनिवार के दिन सुबह काले कपड़े में जटा वाले नारियल को लपेटकर उस पर काजल की 21 बिंदी लगा लें। और घर के बाहर लटका दें। हमेशा घर बुरी नजर से बच कर रहेगा और हमेशा सुख-शांति रहेगी।

व्यवसाय में मनोनुकूल लाभ की प्राप्ति नहीं हो रही हो तो किसी भी शनिवार के दिन नीले कपड़े 21 दानें रक्त गुंजा के बांधकर तिजोरी में रख दें। हर रोज धूप, दीप अवश्य दिखाएं। अपने इष्टदेव का ध्यान करें। ऐसा नियमित करने से व्यापार में लाभ मिलेगा और सफलता भी प्राप्त होगी।

आप अपने व्यापार में अधिक पैसा प्राप्त करना चाहते हैं और चाहते हैं की आपके व्यापार की बिक्री बढ़ जाए तो आप वट वृक्ष की लता को शनिवार के दिन जाकर निमंत्रण दे आएं। (वृक्ष की जड़ के पास एक पान, सुपारी और एक पैसा रख आएं) रविवार के दिन प्रातः काल जाकर उसकी एक जटा तोड़ लाएं, पीछे मुड़कर न देखें। उस जटा को घर लाकर गुग्गल की धूनी दें तथा 101 बार इस मंत्र का जप करें- ॐ नमो चण्ड अलसुर स्वाहा।

 

रविवार के टोटके

यह तांत्रिक उपाय करने के लिए आपको रविवार की रात को सोते समय 1 गिलास में दूध भरकर अपने सिर के पास रखकर सोना है। इसके लिए ध्यान रखें कि नींद में दूध ढुलना नहीं चाहिए। सुबह उठने के बाद नित्य कर्मों से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद इस दूध को किसी बबूल के पेड़ की जड़ में डाल दें। ऐसा हर रविवार की रात की करें। यह एक तांत्रिक उपाय है और इससे आपके ऊपर लगी बुरी नजर दूर होगी। नकारात्मक शक्तियों का असर खत्म होगा और कार्यों में सफलता मिलने लगेगी। पैसों की कमी दूर हो जाएगी। एक अन्य चमत्कारी टोटके के अनुसार यदि संभव हो तो हमेशा चांदी के बर्तन में पानी पीएं। चांदी बर्तन ना हो तो गिलास में पानी भरें और उसमें चांदी की अंगुठी डालकर पानी पीएं। यह प्राचीन, सरल और बहुत चमत्कारी तांत्रिक उपाय है। इससे निश्चित की धन संबंधी मामलों में राहत मिलती है

रविवार की रात को सोते समय 1 गिलास में दूध भरकर अपने सिर के पास रखकर सोना है। इसके लिए ध्यान रखें कि नींद में दूध ढुलना नहीं चाहिए। सुबह उठने के बाद नित्य कर्मों से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद इस दूध को किसी बबूल के पेड़ की जड़ में डाल दें। ऐसा हर रविवार की रात की करें। यह एक तांत्रिक उपाय है और इससे आपके ऊपर लगी बुरी नजर दूर होगी। नकारात्मक शक्तियों का असर खत्म होगा और कार्यों में सफलता मिलने लगेगी। पैसों की कमी दूर हो जाएगी।

व्यापार में घाटा हो रहा हो या काम नहीं चल पा रहा हो, तो आप एक चुटकी आटा लेकर रविवार के दिन व्यापार स्थल या अपनी दुकान के मुख्य द्वार के दोनों ओर थोड़ा-थोड़ा छिड़क दें, साथ में कहें- जिसकी नजर लगी है उसको लग जाये। बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला। यह क्रिया शुक्ल पक्ष में ही करें। संभव हो तो प्रयत्न करें कि इस क्रिया को करते हुए आपको कोई न देखे। गुप्त रूप से यह क्रिया करने पर व्यापार का घाटा दूर होने लगता है। इसके अलावा व्यापार स्थल में मकडिय़ों के जाले व्यापार की वृद्घि को रोकते हैं। अत: व्यापार में बरकत के लिए प्रत्येक शनिवार को दुकान की सफाई आदि करते समय मकड़ी के जालों को अवश्य हटा देना चाहिए।

दीपावली के तांत्रिक उपाय

दीपावली की शाम दीप जालने के बाद तिजोरी अथवा जहां भी आप धन रखते हैं वहां उल्लू की एक तस्वीर लगाएं। पूरे साल आर्थिक लाभ के अवसर मिलते रहेंगे।

दीपावली के दिन प्रात: व्यक्ति बिना स्नान किए, बिना दातुन किए, एक नारियल को पत्थर से बांधकर नदी या तालाब के जल में डुबो दे और डुबोते समय प्रार्थना करे कि शाम को मैं आपको लक्ष्मी के साथ लेने आऊंगा। सूर्यास्त के बाद उस नारियल को जल से निकालकर ले आवें और लक्ष्मीपूजन के साथ उसकी भी पूजा कर भण्डारगृह या संदूक में रख दें तो पूरे वर्ष असाधारण रूप से धन प्राप्त होता रहता है। तीन मास में ही धनप्राप्ति के लिए कुबेर मंत्र मंत्र- यक्षाम कुबेराय वैश्रवणाय, धन-धान्याधिपतये धन-धान्य समृद्धि में देहि दापय स्वाहा। विधि- इस मंत्र को 108 बार जपने से तीन मास में ही लाभ होता है। अक्षय भंडार हेतु महालक्ष्मी मंत्र ओम श्रीं ह्रीं क्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम:। विधि-शुभ तिथि व शुभ दिन प्रात: जप करना प्रारम्भ कर दें। कम से कम 1100 जप तो अवश्य ही करें।

दीपावली की रात्रि में एक मोती शंख या दक्षिणावर्ती शंख को दीपावली पूजन के साथ ही पूजें। किसी भी लक्ष्मी मंत्र की पांच माला या ”श्री सुक्त” के सात पाठ करें। शंख को पूजा स्थान पर ही रहने दें। अगले दिन प्रातःकाल स्नान करके लाल आसन पर बैठकर अपने सामने शंख को रखकर उसी मंत्र का या ”श्री सुक्त” का पाठ करें। प्रत्येक मंत्र के बाद एक साबुत चावल का दाना शंख में डालें। इस प्रकार आप 108 बार मंत्र पाठ कर इतने ही चावल के दाने शंख में डालें। इस प्रकार प्रत्येक दिन पाठ करें। यह आपको तब तक करना है तब तक कि शंख चावलों से न भर जाए। जिस दिन शंख भर जाये उस दिन शाम को एक सुहागिन एवं पांच एक वर्ष से कम उम्र की कन्याओं और कम से कम एक ब्राह्मण को भोजन करवाकर और दक्षिणा देकर विदा करें तथा शंख को किसी लाल वस्त्र

परिवार में पैसे की वजह से कलह रहता हो, तो दक्षिणावर्ती शंख में पांच कौड़ियां रखकर उसे चावल से भरी चांदी की कटोरी पर घर में स्थापित करें। यह प्रयोग शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार को या दीपावली के अवसर पर करें, लाभ अवश्य होगा।

किसी भी शुभ मुहूर्त या अक्षय तृतीया या पूर्णिमा या दीपावली या किसी अन्य मुहूर्त में सुबह जल्दी उठें। सभी आवश्यक कार्यों से निवृत्त होकर लाल रेशमी कपड़ा लें। अब उस लाल कपड़े में चावल के 21 दानें रखें। ध्यान रहें चावल के सभी 21 दानें पूरी तरह से अखंडित होना चाहिए यानि कोई टूटा हुआ दान न रखें। उन दानों को कपड़े में बांध लें। इसके बाद धन की देवी माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजन करें। पूजा में यह लाल कपड़े में बंधे चावल भी रखें। पूजन के बाद यह लाल कपड़े में बंधे चावल अपने पर्स में छुपाकर रख लें। ऐसा करने पर कुछ ही समय में धन संबंधी परेशानियां दूर होने लगेंगी। ध्यान रखें कि पर्स में किसी भी प्रकार की अधार्मिक वस्तु कतई न रखें। इसके अलावा पर्स में चाबियां नहीं रखनी चाहिए। सिक्के और नोट अलग-अलग व्यस्थित ढंग से रखे होने चाहिए। किसी भी प्रकार की अनावश्यक वस्तु पर्स में न रखें। इन बातों के साथ ही व्यक्ति को स्वयं के स्तर भी धन प्राप्ति के लिए पूरे प्रयास करने चाहिए।

होली के पर्व पर एक नए लाल कपडे में लाल गुलाल को बांधकर ( पोटली बना कर ) किसी तश्तरी में अपनी दुकान या घर की तिजोरी में स्थापित करने पर व्यक्ति को जीवन में अपने कार्यों में लगातार लाभ की प्राप्ति होती है , धन का आना लगातार बना रहता है ।

धन योग

पेश है जन्म कुंडली के कुछ प्रमुख धन योग। इनमें से किसी एक योग के होने पर भी व्यक्ति को धन की प्राप्ति अवश्य होती है।

जब कुंडली के दूसरे भाव में शुभ ग्रह बैठा हो तो जातक के पास अपार पैसा रहता है।

जन्म कुंडली के दूसरे भाव पर शुभ ग्रह की दृष्टि हो तब भी भरपूर धन के योग बनते हैं।

चूंकि दूसरे भाव का स्वामी यानी द्वितीयेश को धनेश माना जाता है अत: उस पर शुभ ग्रह की दृष्टि हो तब भी व्यक्ति को धन की कमी नहीं रहती।

दूसरे भाव का स्वामी यानी द्वितीयेश के साथ कोई शुभ ग्रह बैठा हो तब भी व्यक्ति के पास खूब पैसा रहता है।

जब बृहस्पति यानी गुरु कुंडली के केंद्र में स्थित हो।

बुध पर गुरु की पूर्ण दृष्टि हो। (5,7,9)

बृहस्पति लाभ भाव (ग्यारहवें भाव) में स्थित हो।

द्वितीयेश उच्च राशि का होकर केंद्र में बैठा हो।

लग्नेश लग्न स्थान का स्वामी जहां बैठा हो, उससे दूसरे भाव का स्वामी उच्च राशि का होकर केंद्र में बैठा हो।

धनेश व लाभेश उच्च राशिगत हों।

चंद्रमा व बृहस्पति की किसी शुभ भाव में युति हो।

बृहस्पति धनेश होकर मंगल के साथ हो।

चंद्र व मंगल दोनों एकसाथ केंद्र में हों।

चंद्र व मंगल दोनों एकसाथ त्रिकोण में हों।

चंद्र व मंगल दोनों एकसाथ लाभ भाव में हों।

लग्न से तीसरे, छठे, दसवें व ग्यारहवें भाव में शुभ ग्रह बैठे हों।

सप्तमेश दशम भाव में अपनी उच्च राशि में हो।

सप्तमेश दशम भाव में हो तथा दशमेश अपनी उच्च राशि में नवमेश के साथ हो।

 

राहु के टोटके

ऐसे व्यक्ति को अष्टधातु का कड़ा दाहिने हाथ में धारण करना चाहिए।

हाथी दाँत का लाकेट गले में धारण करना चाहिए।

अपने पास सफेद चन्दन अवश्य रखना चाहिए। सफेद चन्दन की माला भी धारण की जा सकती है।

जमादार को तम्बाकू का दान करना चाहिए।

दिन के संधिकाल में अर्थात् सूर्योदय या सूर्यास्त के समय कोई महत्त्वपूर्ण कार्य नही करना चाहिए।

यदि किसी अन्य व्यक्ति के पास रुपया अटक गया हो, तो प्रातःकाल पक्षियों को दाना चुगाना चाहिए।

झुठी कसम नही खानी चाहिए।

गोमेद धारण करे | 

तिल, जौ किसी हनुमान मंदिर में या किसी यज्ञ स्थान पर दान करे |

राहु की दशा होने पर कुष्ट से पीड़ित व्यक्ति की सहायता करनी चाहिए.

गरीब व्यक्ति की कन्या की शादी करनी चाहिए.

शनिवार का व्रत करना चाहिए। भैरव, शिव या चंडी की पूजा करें।

राहु की दशा से आप पीड़ित हैं तो अपने सिरहाने जौ रखकर सोयें और सुबह उनका दान कर दें इससे राहु की दशा शांत होगी.

राहु की दशा में इन चीज़ों से बचें : मदिरा और तम्बाकू के सेवन से राहु की दशा में विपरीत परिणाम मिलता है अत: इनसे दूरी बनाये रखना चाहिए. आप राहु की दशा से परेशान हैं तो संयुक्त परिवार से अलग होकर अपना जीवन यापन करें.

8 मुखी रुद्राक्ष धारण करें।

धन वापिसी

प्रतिदिन प्रात: स्नानादि से निवृत्त होने के पश्चात एक तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरें और उस जल में 11 बीज लाल मिर्च के डाल दें। इसके बाद उक्त जल को सूर्य को अर्पित करें। अर्पित करते वक्त 'ॐ आदित्याय नमः' का जाप करते हुए सूर्य भगवान से धन वापिसी की प्रार्थना करें।

मां लक्ष्मी की प्रतिमा के सामने 11 दिनों तक अखंड ज्योत (तेल का दीपक) प्रज्ज्वलित करें। 11वें दिन 11 कन्या को भोजन कराकर एक सिक्का व मेहंदी दें।

 

आप अपने घर, दुकान या शोरूम में एक अलंकारिक फव्वारा रखें

एक मछलीघर जिसमें 8 सुनहरी व एक काली मछ्ली हो रखें ! इसको उत्तर या उत्तरपूर्व की ओर रखें ! यदि कोई मछ्ली मर जाय तो उसको निकाल कर नई मछ्ली लाकर उसमें डाल दें !

अन्य उपयोगी बातें

 

सुबह उठते ही सर्वप्रथम अपने दोनों हाथों की हथेलियों को जोड़कर गौर से देखें , फिर उसे ३ बार चूम कर अपने चेहरे पर फिराएं , उसके बाद अपने इष्टदेव को मन ही मन में प्रणाम करते हुए अपना दाहिना पावँ जमीन पर रखें , तत्पश्चात अपने माता - पिता के चरण छू कर उनसे आशीर्वाद लें उनका अभिवादन करें तभी कुछ और बोलें ..यह दिन की शुरुआत बहुत ही चमत्कारी मानी जाती है , इससे आप निश्चित ही पूरे दिन उत्साह और प्रसन्नता का अनुभव करेंगे ।

बिल्ली की धूलि शुभ प्रारब्ध का हरण करती है। (नारद पुराणः पूर्व भागः 26.32)

कुत्ता रखने वालों के लिए स्वर्गलोक में स्थान नहीं है। उनका पुण्य क्रोधवश नामक राक्षस हर लेते हैं। (महाभारत महाप्रयाण पर्वः 3.10)

'महाभारत' में यह भी आया है कि 'घऱ में टूटा-फूटा बर्तन, सामान (फर्नीचर), मुर्गा, कुत्ता, बिल्ली होना अच्छा नहीं है। ये शुभ गुणों को हरते हैं।

दूसरे का अन्न, दूसरे का वस्त्र, दूसरे का धन, दूसरे की शय्या, दूसरे की गाड़ी, दूसरे की स्त्री का सेवन और दूसरे के घर में वास – ये इन्द्र के भी ऐश्वर्य को नष्ट कर देते हैं। (शंखलिखित स्मृतिः 17)

जिस तरह शरीर में जीवन न हो तो वह मुर्दा शरीर अशुभ माना जाता है। इसी तरह खाली कलश भी अशुभ है। दूध, घी, पानी अथवा अनाज से भरा हुआ कलश कल्याणकारी माना जाता है। भरा हुआ घड़ा मांगलिकता का प्रतीक है।

वास्तुशास्त्र के अनुसार घर की पश्चिम दिशा में पीपल का वृक्ष होना शुभ है। इसके विपरीत पूर्व दिशा में होना विशेष अशुभ है।

आँवला, बिल्व, नारियल, तुलसी और चमेली सभी दिशाओं में शुभ हैं। कुछ अन्य वृक्षों के लिए शुभ दिशाओं की सूचिः

जामुन – दक्षिण, पूर्व, उत्तर

अनार – आग्नेय, नैर्ऋत्य कोण

केला – तुलसी के साथ सभी दिशाओं में

चंदन – पश्चिम, दक्षिण (पूर्व विशेष अशुभ)

बड़  -  पूर्व (पश्चिम विशेष अशुभ)

कनेर – पूर्व, उत्तर (पश्चिम विशेष अशुभ)

नीम – वायव्य कोण (आग्नेय विशेष अशुभ)

घऱ में बाँस, बेर, पपीता, पलाश और बबूल के वृक्ष सभी दिशाओं में अशुभ माने जाते हैं। आम पूर्व में, सीताफल व गुलाब ईशान कोण में विशेष अशुभ हैं।

अशुभ वस्तुएँ जैसे कि मांस, दुर्घटना का दृश्य, मृतक जीव-जन्तु दिखायी देने पर उसी समय सूर्यनारायण के दर्शन कर लेने चाहिए।

एकादशीः फलाहार

'स्कन्द पुराण' के अनुसार दोनों पक्षों की एकादशी के दिन मनुष्य को ब्राह्ममुहूर्त में उठकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए और पूजा करनी चाहिए। उपवास रखकर रात्रि को भगवान के समीप कथा-कीर्तन करते हुए रात्रि जागरण करना चाहिए। (रात्रि 12 या 1 बजे तक जागरण योग्य है।)

जो लोग उपवास, एकभुक्त (दिन में एक समय फलाहार) अथवा शाम को तारे का दर्शन करने तक व्रत का पालन करते हैं वे धन, धर्म और मोक्ष प्राप्त करते हैं।

अनिवार्य संयोग में इस दिन उपवास न कर सके तो भी चावल तो नहीं खाना चाहिए।

एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए।

एकादशी व्रत खोलने की विधिः द्वादशी को सेवापूजा की जगह पर बैठकर भुने हुए सात चनों के चौदह टुकड़े करके अपने सिर के पीछे फेंकने चाहिए। 'मेरे सात जन्मों के शारीरिक, वाचिक और मानसिक पाप नष्ट हुए' – यह भावना करके सात अंजलि जल पीना और चने के सात दाने खाकर व्रत खोलना चाहिए।

देवउठी एकादशी को भगवान श्रीविष्णु की कपूर से आरती करने पर कभी अकाल मृत्यु नहीं होती। (स्कन्द पुराण)

बह कुल्ला किए बिना पानी या चाय न पीएं। जूठे हाथों से या पैरों से कभी गौ, ब्राह्मण तथा अग्नि का स्पर्श न करें।

घर में देवी-देवताओं पर चढ़ाए गए फूल या हार के सूख जाने पर भी उन्हें घर में रखना अलाभकारी होता है।

अपने घर में पवित्र नदियों का जल संग्रह कर के रखना चाहिए। इसे घर के ईशान कोण में रखने से अधिक लाभ होता है।

काले तिल परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर सात बार उतार (उसार) कर घर के उत्तर दिशा में फेंक दें, धनहानि बंद होगी।

रात में चावल, दही और सत्तू का सेवन करने से लक्ष्मी का निरादर होता है।

शाम के समय सोना, पढ़ना और भोजन करना निषिद्ध है। सोने से पूर्व पैरों को ठंडे पानी से धोना चाहिए, किन्तु गीले पैर नहीं सोना चाहिए। इससे धन का नाश होता है।

भोजन सदैव पूर्व या उत्तर की ओर मुख कर के करना चाहिए। संभव हो तो रसोईघर में ही बैठकर भोजन करें इससे राहु शांत होता है। जूते पहने हुए कभी भोजन नहीं करना चाहिए।

अगर आपको कहीं पर भी थूकने की आदत है तो यह निश्चित है कि आपको यश, सम्मान अगर मुश्किल से मिल भी जाता है तो कभी टिकेगा ही नहीं . wash basin में ही यह काम कर आया करें ! यश,मान-सम्मान में अभिवृध्दि होगी।

जिन लोगों को अपनी जूठी थाली या बर्तन वहीं उसी जगह पर छोड़ने की आदत होती है उनको सफलता कभी भी स्थायी रूप से नहीं मिलती.!बहुत मेहनत करनी पड़ती है और ऐसे लोग अच्छा नाम नहीं कमा पाते.! अगर आप अपने जूठे बर्तनों को उठाकर उनकी सही जगह पर रख आते हैं तो चन्द्रमा और शनि का आप सम्मान करते हैं ! इससे मानसिक शांति बढ़ कर अड़चनें दूर होती हैं।

जब भी हमारे घर पर कोई भी बाहर से आये, चाहे मेहमान हो या कोई काम करने वाला, उसे स्वच्छ पानी ज़रुर पिलाएं !ऐसा करने से हम राहु का सम्मान करते हैं.!

जो लोग बाहर से आने वाले लोगों को हमेशा स्वच्छ पानी पिलाते हैं उनके घर में कभी भी राहु का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता.! अचानक आ पड़ने वाले कष्ट-संकट नहीं आते।

घर के पौधे आपके अपने परिवार के सदस्यों जैसे ही होते हैं, उन्हें भी प्यार और थोड़ी देखभाल की जरुरत होती है.!

जिस घर में सुबह-शाम पौधों को पानी दिया जाता है तो हम बुध, सूर्य और चन्द्रमा का सम्मान करते हुए परेशानियों का डटकर सामना कर पाने का सामर्थ्य आ पाता है ! परेशानियां दूर होकर सुकून आता है।

जो लोग नियमित रूप से पौधों को पानी देते हैं, उन लोगों को depression, anxiety जैसी परेशानियाँ नहीं पकड़ पातीं.!

जो लोग बाहर से आकर अपने चप्पल, जूते, मोज़े इधर-उधर फैंक देते हैं, उन्हें उनके शत्रु बड़ा परेशान करते हैं.!

इससे बचने के लिए अपने चप्पल-जूते करीने से लगाकर रखें, आपकी प्रतिष्ठा बनी रहेगी।

उन लोगों का राहु और शनि खराब होगा, जो लोग जब भी अपना बिस्तर छोड़ेंगे तो उनका बिस्तर हमेशा फैला हुआ होगा, सिलवटें ज्यादा होंगी, चादर कहीं, तकिया कहीं, कम्बल कहीं ?

उसपर ऐसे लोग अपने पुराने पहने हुए कपडे़ तक फैला कर रखते हैं ! ऐसे लोगों की पूरी दिनचर्या कभी भी व्यवस्थित नहीं रहती, जिसकी वजह से वे खुद भी परेशान रहते हैं और दूसरों को भी परेशान करते हैं.!

इससे बचने के लिए उठते ही स्वयं अपना बिस्तर समेट दें.! जीवन आश्चर्यजनक रूप से सुंदर होता चला जायेगा।

पैरों की सफाई पर हम लोगों को हर वक्त ख़ास ध्यान देना चाहिए, जो कि हम में से बहुत सारे लोग भूल जाते हैं ! नहाते समय अपने पैरों को अच्छी तरह से धोयें, कभी भी बाहर से आयें तो पांच मिनट रुक कर मुँह और पैर धोयें.!

आप खुद यह पाएंगे कि आपका चिड़चिड़ापन कम होगा, दिमाग की शक्ति बढे़गी और क्रोध

धीरे-धीरे कम होने लगेगा.! आनंद बढ़ेगा।

रोज़ खाली हाथ घर लौटने पर धीरे-धीरे उस घर से लक्ष्मी चली जाती है और उस घर के सदस्यों में नकारात्मक या निराशा के भाव आने लगते हैं.!

इसके विपरीत घर लौटते समय कुछ न कुछ वस्तु लेकर आएं तो उससे घर में बरकत बनी रहती है.!

उस घर में लक्ष्मी का वास होता जाता है.! हर रोज घर में कुछ न कुछ लेकर आना वृद्धि का सूचक माना गया है.!

ऐसे घर में सुख, समृद्धि और धन हमेशा बढ़ता जाता है और घर में रहने वाले सदस्यों की भी तरक्की होती है.!

जूठन बिल्कुल न छोड़ें । ठान लें । एकदम तय कर लें। पैसों की कभी कमी नहीं होगी।

अन्यथा नौ के नौ गृहों के खराब होने का खतरा सदैव मंडराता रहेगा। कभी कुछ कभी कुछ । करने के काम पड़े रह जायेंगे और समय व पैसा कहां जायेगा पता ही नहीं चलेगा।

सु बह घर से काम के लिए निकलने से पहले नियमित रूप से गाय को रोटी दें।

एक पात्र में जल लेकर उसमें कुंकुम डालकर बरगद के वृक्ष पर नियमित रूप से चढ़ाएं।

सुबह घर से निकलने से पहले घर के सभी सदस्य अपने माथे पर चन्दन तिलक लगाएं।

मछलियों की आटे की गोली बनाकर खिलाएं।

चींटियों को खोपरे व शकर का बूरा मिलाकर खिलाएं।

शुद्ध कस्तूरी को चमकीले पीले कपड़े में लपेटकर अपनी तिजोरी में रखें। इन टोटकों को पूर्ण श्रद्धा के साथ करने से जीवन में समृद्धी व खुशहाली आने लगती है। घर के मुख्यद्वार के दोनों ओर पत्थर या धातु का एक-एक हाथी रखने से सौभाग्य में वृद्धि होती है।

भवन में आपके नाम की प्लेट को बड़ी एवं चमकती हुई रखने से यश की वृद्धि होती है।

स्वर्गीय परिजनों के चित्र दक्षिणी दीवार पर लगाने से उनका आशीर्वाद मिलता रहता है।

विवाह योग्य कन्या को उत्तर-पश्चिम के कमरे में सुलाने से विवाह शीघ्र होता है।

किसी भी दुकान या कार्यालय के सामने वाले द्वार पर एक काले कपडे में फिटकरी बांधकर लटकाने से बरकत होती है। धंधा अच्छा चलता है।

दुकान के मुख्य द्वार के बीचों बीच नीबूं व हरी मिर्च लटकाने से नजर नहीं लगती है।

घर में स्वस्तिक का निशान बनाने से निगेटिव ऊर्जा का क्षय होता है

किसी भी भवन में प्रात: एवं सायंकाल को शंख बजाने से ऋणायनों में कमी होती है।

घर के उत्तर पूर्व में गंगा जल रखने से घर में सुख सम्पन्नता आती है।

पीपल की पूजा करने से श्री तथा यश की वृद्धि होती है। इसका स्पर्श मात्रा से शरीर में रोग प्रतिरोधक तत्वों की वृद्धि होती है।

घर में नित्य गोमूत्र का छिडकाव करने से सभी प्रकार के वास्तु दोषों से छुटकारा मिल जाता है।


मुख्य द्वार में आम, पीपल, अशोक के पत्तों का बंदनवार लगाने से वंशवृद्धि होती है।

आरती के समय कपूर जलाने का विधान है। घर में नित्य कपूर जलाने से घर का वातावरण शुद्ध रहता है, शरीर पर बीमारियों का आक्रमण आसानी से नहीं होता, दुःस्वप्न नहीं आते और देवदोष तथा पितृदोषों का शमन होता है।

कपूर मसलकर घर में (खासकर कर ध्यान-भजन की जगह पर) थोड़ा छिड़काल कर देना भी हितावह है।

दीपज्योति अपने से पूर्व या उत्तर की ओर प्रगटानी चाहिए। ज्योति की संख्या 1,3,5 या 7 होनी चाहिए।

दिन में नौ बार की हुई किसी भी वक्तवाली प्रार्थना अंतर्यामी तक पहुँच ही जाती है।

सूर्य से आरोग्य की, अग्नि से श्री की, शिव से ज्ञान की, विष्णु से मोक्ष की, दुर्गा आदि से रक्षा की, भैरव आदि से कठिनाइयों से पार पाने की, सरस्वती से विद्या के तत्त्व की, लक्ष्मी से ऐश्वर्य-वृद्धि की, पार्वती से सौभाग्य की, शची से मंगलवृद्धि की, स्कंद से संतानवृद्धि की और गणेश से सभी वस्तुओं की इच्छा (याचना) करनी चाहिए। (लौगाक्षि स्मृति)

उत्तरायण देवताओं का प्रभातकाल है। इस दिन तिल के उबटन व तिलमिश्रित जल से स्नान, तिलमिश्रित जल का पान, तिल का हवन, तिल का भोजन तथा तिल का दान – ये सभी पापनाशक प्रयोग हैं।

धनतेरस के दिन दीपक का दान करने से अकाल मृत्यु नहीं होती। पक्षियों को दाना डालने वाले को मृत्यु के पहले जानकारी हो जाती है।

महर्षि पुष्कर कहते हैं- 'परशुरामजी ! प्रणव परब्रह्म है। उसका जप सभी पापों का हनन करने वाला है। नाभिपर्यन्त जल में स्थित होकर ॐकार का सौ बार जप करके अभिमंत्रित किये गये जल को जो पीता है, वह सब पापों से मुक्त हो जाता है।'(अग्नि पुराणः अ. 251)

जो जलाशय में स्नान नहीं कर सकते वे कटोरी में जल लेकर घर पर ही यह प्रयोग कर सकते हैं।

बाल तथा नाखून काटने के लिए बुधवार और शुक्रवार के दिन योग्य माने जाते हैं। एकादशी, चतुर्दशी, अमावस्या, पूर्णिमा, सूर्य-संक्रान्ति, शनिवार, मंगलवार, गुरुवार, व्रत तथा श्राद्ध के दिन बाल एवं नाखून नहीं काटने चाहिए, न ही दाढ़ी बनवानी चाहिए।

तुम चाहे जितनी मेहनत करो परंतु तुम्हारी नसों में जितना अधिक ओज होगा, जितनी ब्रह्मचर्य की शक्ति होगी उतना ही तुम सफल होओगे।

प्रतिदिन प्रातःकाल सूर्योदय के बाद नीम व तुलसी के पाँच-पाँच पत्ते चबाकर ऊपर से थोड़ा पानी पीने से प्लेग तथा कैंसर जैसे खतरनाक रोगों से बचा जा सकता है।

सुबह खाली पेट चुटकी भर साबुत चावल (अर्थात् चावल के दाने टूटे हुए न हों) ताजे पानी के साथ निगलने से यकृत (लीवर) की तकलीफें दूर होती हैं।

केले को सुबह खाने से उसकी कीमत ताँबे जैसी, दोपहर को खाने से चाँदी जैसे और शाम खाने से सोने जैसी होती है। शारीरिक श्रम न करने वालों को केला नहीं खाना चाहिए। केला सुबह खाली पेट भी नहीं खाना चाहिए। भोजन के बाद दो केला खाने से पतला शरीर मोटा होने लगता है।

जलनेति करने से आँख, नाक, कान और गले की लगभग 1500 प्रकार की छोटी-बड़ी बीमारियाँ दूर होती हैं।

रोज थोड़ा-सा अजवायन खिलाने से प्रसूता की भूख खुलती है, आहार पचता है, अपान वायु छूटती है, कमरदर्द दूर होता है और गर्भाशय की शुद्धि होती है।

रात का शंख में रखा हुआ पानी तोतले व्यक्ति को पिलाने से उसका तोतलापन दूर होने में आशातीत सफलता मिलती है। चार सूखी द्राक्ष रात को पानी में भिगोकर रख दें। उसे सबेरे खाने से अदभुत शक्ति मिलती है।

पश्चिम दिशा की हवा, शाम के समय की धूप स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

बालकों की निर्भयता के लिए गाय की पूँछ का उतारा करें।

ग्रीष्मकाल में एक प्याज को (ऊपर का मरा छिलका हटाकर) अपनी जेब में रखने मात्र से लू नहीं लगती।

क्रोध आये उस वक्त अपना विकृत चेहरा आईने में देखने से भी लज्जावश क्रोध भाग जायेगा।

लम्बी यात्रा शुरू करते समय बायाँ स्वर चलता हो तो शुभ है, सफलतापूर्वक यात्रा पूरी होगी व विघ्न नहीं आयेगा। छोटी मुसाफिरी के लिए दायाँ स्वर चलता हो तो शुभ माना जाता है।

व्रत-उपवास में औषधि ले सकते हैं।

सात्त्विकता और स्वास्थ्य चाहने वाले एक दूसरे से हाथ मिलाने की आदत से बचें। अभिवादन हेतु दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम करना उत्तम है।

बेटी की विदाई बुधवार के दिन न करें। अन्य दिनों में विदाई करते समय एक लोटा पानी में हल्दी मिलाकर लोटे से सिर का उतारा देकर भगवन्नाम लेते हुए घर में छाँटे। इससे बेटी सुखी और खुशहाल रहेगी।

यदि जीवन में लगातार कार्यों में बाधाएं आती है तो किसी भी दिन किसी मंदिर में अनाज के दाने चड़ाकर सच्चे मन से अपनी मनोकामना को कहिये , काम अवश्य ही निर्विघ्न रूप से पूर्ण और सफल होगा